
गागन मल्होत्रा ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट श्मशान घाटों से शवों के उतारे गए कपड़े अब बाजारों तक पहुंच रहे हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि इन्हें धोकर, प्रेस कर और पैकिंग करके नए कपड़ों की तरह बेचा जा रहा है। दावा है कि लोग इन्हें शादी, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों में भी पहन रहे हैं।
भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि इंदौर के कई मुक्तिधामों से साड़ियां, शॉल, कुर्ता-पायजामा, पेंट-शर्ट और तौलिए इकट्ठा किए जाते हैं। फिर एजेंटों और दलालों के जरिए इन्हें बड़े व्यापारियों तक पहुंचाया जाता है। वहां से माल अहमदाबाद समेत दूसरे शहरों में भेजा जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, मालवा मिल मुक्तिधाम, पंचकुईया, सयाजी और बाणगंगा मुक्तिधाम सहित कई जगहों पर यह खेल चल रहा है। एजेंट खुलेआम कपड़ों के रेट बताते मिले — साड़ियां 70-80 रुपए, शॉल 20-40 रुपए और कुर्ता-पायजामा 45 रुपए तक में बेचे जा रहे थे।
सबसे डराने वाली बात यह है कि इन कपड़ों को इस तरह साफ और पैक किया जाता है कि कोई पहचान ही नहीं पाए कि ये श्मशान से आए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि पूरे नेटवर्क का माल गुजरात तक सप्लाई किया जा रहा है।
धर्म, आस्था और इंसानियत से जुड़े इस मामले ने लोगों को हिला कर रख दिया है। अब सवाल यह है कि आखिर इतने बड़े नेटवर्क पर कार्रवाई कब होगी?



















