November 3, 2026 11:32 am

Category: आज फोकस में

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दिल्ली के जैतपुर में SBI की इस मिनी ब्रांच में एक युवक ₹1,100 निकालने पहुँचा, जिसे उसे नकद दे दिया गया। इसके बाद उसके खाते से ₹7,000 के फिर से ट्रांजैक्शन हुए। जब युवक अपने ₹7,000 माँगने पहुँचा, तो मिनी ब्रांच का ये मैनेजर ने कहा कि पैसा अभी पेंडिंग है या ट्रांजैक्शन फेल हो गया है। युवक बड़े SBI ब्रांच में जानकारी लेन

“ई-रिक्शा वाले ने कहा—’मैडम 20 रुपये में छोड़ दूँगा।’ लेकिन तभी जो हुआ, उसने मेरे रोंगटे खड़े कर दिए और मेरी अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया…” ​शाम ढलने को थी और दोपहर की चिलचिलाती धूप शरीर को झुलसा रही थी। मैं चौराहे पर खड़ी सवारी का इंतजार कर रही थी। तभी एक पैडल रिक्शा वाला मेरे पास आया। चेहरे पर थकान और झुर्रियों में छिपी लाचारी साफ़ झलक रही थी। उसने धीमी आवाज़ में पूछा— “बहन जी, कहाँ जाएँगी?” ​मैंने अपनी मंजिल बताई और पूछा, “कितने पैसे लोगे?” उसने रुमाल से माथे का पसीना पोंछते हुए कहा— “40 रुपये।” ​मैंने हामी भर ही दी थी कि तभी एक ई-रिक्शा वाला अचानक वहाँ आ रुका। उसने झट से कहा— “मैडम! बैठिए, मैं आपको सिर्फ 20 रुपये में पहुँचा दूँगा!” ​​

मशहूर पंजाबी सिंगर और एक्‍टर दिलजीत दोसांझ लगातार सुर्ख‍ियों में हैं। तमाम विवादों के बीच बीते 30 अक्टूबर को दिल्ली में कॉन्सर्ट के साथ उन्‍होंने अपने ‘ऑरा इंडिया टूर 2026’ की शुरुआत की।

संभोग की चाहत जितनी तेजी से नई उम्र लड़कियों में बढ़ रही हैं , उसे देखते हुए ये बोलना कोई गलत नहीं होगा कि भविष्य में पुरुष वैश्यवृत्ति में जबरदस्त इजाफा होने वाला है अपने 22 साल के मेडिकल करियर में मैने ये देखा है आज में पुणे के एक बहुत ही नामचित संस्था में बतौर स्त्री रोग विशेषज्ञ काम करती हूं,

कोट के पीछे कितनी थकान छुपी होती है। चीन के फ़ुझोउ शहर में फ़ुजियान मेडिकल यूनिवर्सिटी यूनियन हॉस्पिटल के 17 लोगों की मेडिकल टीम ने एक मरीज़ का बेहद मुश्किल ऑपरेशन किया। मरीज़ के दिमाग़ में कई ट्यूमर थे, और साथ ही दिमाग़ की एक नस में ख़तरनाक सूजन भी थी। डॉक्टरों के मुताबिक़ सारे

प्रेस परिषद आयोग के सदस्य रजा रिजवी को अटल अवार्ड देकर पेजा ने किया सम्मानित लखनऊ सहानुभूति समाचार गरिमा सिंह प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक जर्नलिस्ट एसोसिएशन के राष्ट्रीय सचिव एवं प्रेस प्रवक्तत सरकार ने प्रेस आयोग परिषद नई दिल्ली का सदस्य नामित करने पर कार्यालय

हमने गलत प्रोफेशन (पत्रकारिता) चुन लिया. कभी-कभी लगता है जैसे ख़ुद को बर्बाद कर रहे हैं. हमारे फैमिली स्टेटस के हिसाब से यह सही नहीं है. क्षेत्रीय मुद्दों पर पत्रकारिता करने में न पैसा है न इज्जत. ऊपर से बदनामी मुफ़्त में मिलती है. पहले तो इस बात को रत्ती भर भी नहीं मानते थे, सोचते थे पैसे का क्या ही क