
ये सब लड़कियाँ उन घरों से है जहां एक ही लड़की है ओर मकान मुस्लिम दामाद को ही जाता अगर पुलिस न पकड़ती । ये सब बिरादरियों के साथ साथ सभी गैर मुस्लिम सावधान होकर समझे कि मुस्लिम के घरों में जनसंख्या बढ़ने से बहुत तंगी हो गई है ओर ये ऐसे गैर मुस्लिम घर ढूँढ रहे है जिनके पास सिर्फ एक लड़की है या फिर भाई दूर चला गया है या भाई कश्मीरी हिन्दुओं की तरह कमजोर है जो 2 थप्पड़ खाते ही मुस्लिम जीजा के नाम मकान कर देगा !!
15 साल तक बापू ने हार्डिया को जे@ हादी के पास नहीं जाने दिया था। बाद में जेहादी ने 4 साल में 5 बच्चे पैदा कर के उसे छोड़ दिया तीन तलाक दे के । तब उसने बापू की फिर मदद माँगी । बापू को मदद कर देनी चाहिए थी क्योंकि हंडिया के पाँचों बच्चे हिन्दू घर में आ जाते ओर हिन्दू बनते ।
प्रेस्टीज issue न बनाए कोई भी गैर मुस्लिम इन बातों को । यूरोप अमेरिका की गोरी सरकार ओर यहूदी माँ-बाप 18 वर्ष तक भी अपनी ईसाई यहूदी लड़की को वापिस ले लेते है; क्योंकि 18 वर्ष तक बच्चे माँ के पास ही रहने होते हैं ओर हिन्दू माँ-बाप के पास आने पर बच्चे फिर हिन्दू बन जाएंगे । मुगल सती होने जाने के लिए जाती हुई राजपूत व वाल्मीकि, ब्राह्मण, बनिया स्त्रियों को उठा कर मुसलमान की तीसरी चौथी बीवी बना देते थे ओर बच्चे भी बाद में अपनी मर्जी से माँ के पास आ जाते थे ओर वो भी मुसलमान बन जाते थे । इसीलिए 1192 में भारतीय उपमहाद्वीप में जहां 1 भी मुस्लिम नहीं था वहां आज 50 करोड़ मुस्लिम है।।—
*हादिया केस से सबक: अब चुप बैठने का समय नहीं*
हादिया केस ने एक रास्ता दिखाया। जब लड़की को उसके पिता ने कोर्ट में वापस माँगा, तो केरल हाई कोर्ट ने पिता की बात सुनी और बेटी को घर भेजा। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने बालिग की मर्ज़ी को ऊपर रखा।
इस पूरे केस से 3 बातें साफ हुईं:
1. *जब माता-पिता लड़ते हैं, तो सिस्टम सुनता है।* हादिया के पिता के.एम. अशोकन ने हार नहीं मानी। Habeas Corpus डाली, हाई कोर्ट गए। अगर वो चुप बैठ जाते, तो केस शुरू ही नहीं होता।
2. *बेटी को “प्रेस्टीज इश्यू” बनाकर छोड़ना सबसे बड़ी गलती है।* समाज क्या कहेगा, इस डर से कई माता-पिता कोर्ट/पुलिस तक जाते ही नहीं। नतीजा: बेटी हमेशा के लिए दूर हो जाती है। इज़राइल का *Lehava संगठन* इस बात को समझता है। वो मानता है कि शादी के बाद भी अगर यहूदी लड़की परेशान है और वापस आना चाहती है, तो उसकी मदद करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है। वो “लोग क्या कहेंगे” नहीं सोचते, “बेटी कैसे बचाएंगे” सोचते हैं।
3. *क़ानूनी लड़ाई + सामाजिक सपोर्ट = वापसी का रास्ता।* Lehava वाले जैसे ही लड़की की अनबन की खबर मिलती है, लीगल टीम और परिवार मिलकर एक्शन लेते हैं। बच्चों समेत लड़की को सुरक्षित घर लाते हैं।
*तो हिन्दू, बौद्ध, सिख माता-पिता क्या करें?*
1. *शर्म छोड़ो, एक्शन लो*: अगर आपको लगता है कि बेटी को बहला-फुसलाकर ले जाया गया है, तो तुरन्त Habeas Corpus फाइल करो। पुलिस में शिकायत दो। केरल हाई कोर्ट ने पिता की सुनी थी।
2. *सम्पर्क कभी मत तोड़ो*: सुनिधि चौहान का केस देखो। माँ-बाप ने साथ दिया तो वो बच्चों समेत वापस आ गई। हादिया केस में भी कोर्ट ने कहा कि पिता बेटी से मिल सकता है। दरवाज़ा खुला रखो।
3. *समाज का “Lehava” बनाओ*: एक अकेला बाप नहीं लड़ेगा। मोहल्ले, रिश्तेदार, संगठन – सबको मिलकर सपोर्ट सिस्टम बनाना होगा। लीगल मदद, काउंसलिंग, आर्थिक मदद। जब लड़की को लगे कि पीछे पूरा परिवार खड़ा है, तभी वो हिम्मत करेगी।
- 4. *सही मौके का इन्तज़ार करो*: ज़बरदस्ती नहीं। पर जैसे ही बेटी को लगे कि गलती हुई है, या ससुराल में दिक्कत है, तुरन्त पहुँचो। Lehava मॉडल यही है – झपट पड़ो और सुरक्षित निकाल लाओ।

*याद रखो: बालिग की मर्ज़ी कानून है, पर माँ-बाप की ममता उससे बड़ी है।*
बेटी अगर एक बार चली भी गई, तो दरवाज़ा बन्द मत करो। हादिया के पिता ने दरवाज़ा खुला रखा, तभी केस लड़ पाया। आप भी रखो।


















