October 27, 2026 1:40 pm

#सावधान! आपकी बगल वाली सीट पर बैठा ‘सज्जन’ यात्री आपका हमसफर नहीं, बल्कि ‘साहसी गैंग’ का

#सावधान! आपकी बगल वाली सीट पर बैठा ‘सज्जन’ यात्री आपका हमसफर नहीं, बल्कि ‘साहसी गैंग’ का वह शिकारी हो सकता है जो आपकी रेकी कर रहा है……। डरिए नहीं, लेकिन सावधान हो जाइए……। पटरियों पर दौड़ती ट्रेन के बंद डिब्बे में जब आप चैन की नींद सो रहे होते हैं, तब कुछ जोड़ी आंखें अंधेरे में आपके गले की नली और बैग की चेन को तौल रही होती हैं। जीआरपी प्रयागराज ने रेल पटरियों के उन ‘शतिरों’ को दबोचा है, जिन्होंने सफर को खौफ का दूसरा नाम बना दिया था। यह कोई मामूली चोर नहीं, बल्कि ‘साहसी गैंग’ के वो शातिर दरिंदे हैं, जो कत्ल के इरादे वाली मजबूती और सलीकेदार लिबास पहनकर मौत का जाल बिछाते थे।

सावधान रहें! अगली बार जब आप ट्रेन के दरवाजे पर बेवजह की भीड़ देखें, तो उसे ‘रेलवे की अव्यवस्था’ समझने की भूल न करें। वह भीड़ नहीं, बल्कि आपकी गर्दन को दबोचने के लिए बिछाया गया एक जाल हो सकता है। प्रयागराज जीआरपी ने ‘साहसी गैंग’ के उन चार आदमखोर शिकारियों को दबोचा है, जो सभ्य यात्रियों का चोला पहनकर पटरियों पर मौत और लूट का तांडव मचा रहे थे।

यह ट्रेन के अंदर रात में तो रेकी करते थे और फिर अपराध करने के बाद फरार। प्रयागराज जीआरपी थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अकलेश कुमार सिंह के नेतृत्व में सोमवार नौ फरवरी को जब इस गिरोह का पर्दाफाश हुआ, तो अपराध की ऐसी कहानी सामने आई जिसने सुरक्षा तंत्र की रूह कंपा दी। ये अपराधी फटेहाल या संदिग्ध नहीं दिखते थे। इनका ‘गेटअप’ किसी कॉरपोरेट ऑफिस में काम करने वाले शख्स जैसा शानदार होता था—कंधे पर महंगा पिट्ठू बैग, बदन पर सलीकेदार कपड़े और जेब में कंफर्म टिकट। लेकिन इस भद्र लिबास के पीछे छिपे थे कत्ल के इरादे वाली मजबूती और शैतानी दिमाग।

इंस्पेक्टर अकलेश कुमार सिंह ने बताया कि इनका वार करने का तरीका किसी सस्पेंस फिल्म की पटकथा जैसा था। इनका गिरोह मुख्य रूप से चार हिस्सों में बंटा था।

जैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म की मद्धम रोशनी में दाखिल होती, गिरोह के दो सदस्य दरवाजे पर ‘चट्टान’ बनकर खड़े हो जाते। वे ऐसा दिखावा करते मानो उतरने वालों की भारी भीड़ हो।

तीसरा सदस्य आपके ठीक पीछे आकर खड़ा होता और आपको आगे की तरफ जोर से धकेलता।

आप आगे और पीछे के बीच ‘सैंडविच’ बन जाते। जब भीड़ के दबाव से आपकी सांसें उखड़ रही होतीं और आपका पूरा ध्यान खुद को बचाने पर होता, ठीक उसी पल ‘हंटर’ आपकी जेब, बैग की चेन या गले के हार पर बिजली की गति से हाथ साफ कर देता।

अगर किसी यात्री ने विरोध की जुर्रत की, तो ये अपनी पहलवानी और मजबूत कद-काठी के दम पर उसे वहीं शारीरिक रूप से दबा देते थे। यात्री दहशत में चुप हो जाता और ये शिकारी अगले ही पल हवा में ओझल हो जाते।

“शादी के सीजन में ये शिकारी और भी खूंखार हो जाते थे। तब इनकी संख्या 4 से बढ़कर 8 हो जाती थी, क्योंकि तब ‘सोने’ की गंध इन्हें दूर से ही खींच लाती थी।”

पुलिस इन सायों का पीछा पिछले तीन दिनों से कर रही थी। सस्पेंस और थ्रिलर का अंतिम अध्याय सोमवार सुबह नैनी जंक्शन के प्लेटफार्म नंबर 4 पर लिखा गया। जीआरपी की टीम सादे लिबास में घात लगाकर बैठी थी। जैसे ही ये चारों शिकारी एक शिकार की टोह में ट्रेन की तरफ बढ़े, सादे कपड़ों में तैनात पुलिस के जांबाजों ने इन्हें जमीन पर पटक दिया।

गिरफ्तार अभियुक्तों का कच्चा चिट्ठा:

* रामपाल: हरियाणा के जिंद का रहने वाला, गैंग का मास्टरमाइंड।

* विनोद कुमार: दिल्ली का रहने वाला शातिर अपराधी, जिस पर पहले से कई मुकदमे दर्ज हैं।

* सुरेश और बिट्टू: हरियाणा के रोहतक और जिंद के रहने वाले, जो भीड़ में ‘दीवार’ बनने का काम करते थे।

इनके पास से चार कीमती स्मार्टफोन बरामद हुए हैं, जिनकी कीमत हजारों में है, लेकिन इनका असली गुनाह वो दहशत है जो इन्होंने हजारों यात्रियों के मन में भरी थी।

जीआरपी इंस्पेक्टर की चेतावनी को गांठ बांध लीजिए: “ट्रेन के गेट पर होने वाली हर भीड़ इत्तेफाक नहीं होती। कभी-कभी वो आपको लूटने के लिए खड़ा किया गया ‘साहसी गैंग’ होता है।” सफर में सतर्क रहें, क्योंकि शिकारी अभी भी घात लगाए बैठे हो सकते हैं।

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