
ममता ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट मेरी दादी अक्सर कहती थी ‘इकलौते लड़के के लिए लड़की कभी मत दो,वरना लड़की जीवन भर कष्ट में रहेगी’ छोटे थे तो ये बात समझ नहीं आती थी फिर बड़े हुए तो दादी से कारण पूछा दादी ने समझाया ‘जिनके एक बेटा होता है अक्सर ऐसा होता है वो लाड़ में बिगड़ा हुआ होता है उनकी माये बेटे का घर बसाने के लिए ब्याह नहीं करती बल्कि बेटे के बिगड़े होने का ठीकरा बहु के सिर पर फोड़ सकें इसलिए ब्याहती हैं, दूसरा जहां दो तीन बहूएं होती हैं तो आपस में तुलना होती है अच्छाई बुराई बंट जाती है इकलौती बहु में जीवन सिर्फ बुराई ही दिखेंगी उसकी कभी कदर नहीं होगी”
दादी की ये बात काफी हद तक ठीक भी है क्योंकि आसपास ऐसी कई महिलायें देखी है जो अपने बेटे को ब्याह तो देती हैं पर बहु बेटे को साथ देखकर इनके आग लगने लगती है ये ऐसे त्रिया चरित्र दिखाती हैं कि बेटा इनके आगे पीछे ही दौड़ता रहता है । लेकिन इसके लिए बेटे का इकलौता होना जरूरी नहीं है माई पूता होना काफी है इकलौता हो तो चांस बढ़ जाते हैं पर कई महिलाओं पर ऐसा जादू आता है कि पति और बेटे उनके आगे पीछे घूमते हैं , ये महिलायें इतनी बड़ी एक्टर होती हैं कि यदि फिल्मों में गई होती तो ऑस्कर भास्कर सब जीत लाती । एक मिनट में आँसू बहाकर रोने लगती हैं आधे मिनट में बेहोश हो सकती हैं , सेकेंड के अंदर अंतिम साँस लेकर बहु के खून पीने को तैयार हो जाती हैं । कमाल की बात ये होती है कि बहु और पोते पोती को इनके ड्रामे साफ दिख रहे होते हैं पर बेटे और पति की बुद्धि पर जाने कौन सी कंपनी का ताला जड़ती हैं कि उन्हें ड्रामे सच लगते हैं । स्त्री स्त्री की दुश्मन होती है ये इन्हीं महिलाओं को देखकर लिखा गया होगा क्योंकि इन्हें तो बुढ़ापे में भी अपना खसम एकदम आसपास चाहिए लेकिन बेटा बहु के पास जाता है तो इनको हार्ट अटैक आने लगता है । दिल्ली में मेरी एक दोस्त थी बेचारी ऐसे ही एक मातृ भक्त को ब्याही थी और सास अपने बेटे पर ऐसे कब्जा जमाए थी कि कहीं बहु उनके बेटे को मोहपाश में न बांध ले, बहु के हाथ का खाना तक नहीं खाने देती थी ,बेडरूम में नहीं जाने देती थी ।बहु शरीफ थी और बेटा माँ के सामने बोल नहीं पाता वो बहु बेचारी पति से प्रेम करती थी वो अठारह वर्ष तक इंतजार करती रही कभी तो पति उसकी तरफ आएगा । कभी कोई मौका मिला होगा तो गलती से एक बेटा भी हुआ जो सोलह वर्ष का हो गया है आखिर बहु हार गई और तलाक ले लिया अब अपने बेटे के भविष्य को बनाने में लगी है आगे जाने वो किस तरह की सास होगी नहीं पता पर जिन माओं को अपने बेटे इतने प्यारे होते हैं कि वे बहु से शेयर नहीं कर सकती तो अपने बेटे को ब्याहती क्यों हैं ? ये माएं यदि अपनी बहु को तकलीफ देकर खुश हो रही हैं तो ये समझ ही नहीं पा रही अपने साथ साथ अपने बेटे का बुढ़ापा बिगाड़ रही हैं । पूरी जवानी जो बहु अकेले अपने बच्चों को पाल रही है वो बुढ़ापे में वो उस पति को बर्दाश्त कर पाएगी मुझे तो शक है ? और बच्चों को तो पिता के प्रेम का एहसास ही नहीं क्या होता है तो केयर कैसे करे



















