
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की रिपोर्ट
पहली बार किसी ने माई लार्ड नही मिस्टर ज्यूडिशियल सर्वेंट कहा है भरे अदालत में न्यायाधीश को…
मुझे समझ में नही आ रहा है कि इसपर कैसे लिखूं..एक नजरीया तो ये कह रहा कि ये ट्रॉमा है,डिलेय जस्टीस का गुस्सा है…
पर दूसरा नजरीया ये कह रहा कि यूथ में पेशेंस नही है और कानून के काम करने का तरीका कोई फिल्मी सीन जैसा नही हो सकता,तेजी से अन जस्टिस की जगह देर से जस्टिस भली है …
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में आज हाईवोल्टेज ड्रामा क्रिएट हो गया है जो कि संभावित था कि देर सवेर होनी ही थी…
सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई के दौरान उस समय भयंकर स्थिति बन गई, जब स्वयं अपनी पैरवी कर रहे एक याचिकाकर्ता वकील प्रबल प्रताप ने जजों की बेंच से कहा मैं ACP के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश देता हूँ क्योंकि मैं ही Sovereign हूँ…अब यहां sovereign का मतलब उसका खुद के सर्वोच्च मानने से था या कुछ और ये तो अब उसपर एक्शन होगा तब पता चलेगा…
पर इस पर जब न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन ने उस वकील से पूछा कि क्या आप हमें आदेश दे रहे हैं?
इसके कुछ ही क्षण बाद याचिकाकर्ता वकील ने अदालत कक्ष में कागज हवा में उछाल दिए और भारत के मुख्य न्यायाधीश के लिए अपमानजनक भाषा का प्रयोग करते हुए कहा, “ये दे देना मा***” CJI को…
तब पुलिस उसे पकड़ कर ले गई…पता नही ये सस्ती पब्लिसिटी के लिए कर गया या फिर उब कर…पर जो भी किया है उसने ठंडे दिमाग से किया है तो वकील होने के नाते किंसिक्वेंशेस उसे मालूम ही होंगे…
पर सच में न्यायालय अब सम्मान खोते जा रहे हैं,जो उनकी साल दर साल लंबित न्यायिक प्रक्रिया की वजह से है..
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