
वेनीता ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
इंग्लैंड से एक मैडम आईं—नाम था अलेक्जेंड्रा। जेएनयू से हिंदी का क्रैश कोर्स करके आई थीं, तो उनको घमंड था कि वो इंडिया को घोट के पी चुकी हैं। हाथ में आईफोन, आँखों पर काला चश्मा और पैर में वो सफेद वाला बूट। आते ही अस्सी घाट पर पप्पू की दुकान के सामने खड़ी हुईं और अपनी नकली हिंदी में बोलीं, “एक्सक्यूज मी! मुझे यहाँ ‘स्पिरिचुअलिज्म’ और ‘मोक्ष’ पर ग्राउंड रिसर्च करना है। कोई गाइड मिलेगा?”
वहां बेंच पर हमारे ‘कलुआ गुरु’ लेटे हुए थे। कलुआ गुरु ने बनारसी चश्मे के ऊपर से मेमसाब को देखा, मुंह का पान थूका और बोले, “ए मेमसाब! ई स्पिरिचुअलिज्म का होता है बे? मोक्ष समझना है, तो पहले ई जो हाथ में बिसलेरी की बोतल ली हो ना, इसको फेंको। और सामने जो सांड खड़ा है, जरा जाके उसके पैर छुओ!”
अलेक्जेंड्रा भड़क गईं, “व्हाट? आर यू मैड? सांड पैर छूने से मोक्ष मिलता है?”
कलुआ गुरु मुस्कुराए, “अरे नहीं मेमसाब, सांड जब तुमको उठा के गंगा जी में फेंकेगा, तब जो अंदर से ‘हरे रामा हरे कृष्णा’ निकलेगा ना, असली मोक्ष वही है!” आसपास के लौंडे ठहाका मार के हंस दिए। मेमसाब का आधा भौकाल वहीं टाइट हो गया।
दोपहर में मेमसाब को भूख लगी। कलुआ गुरु उनको लेकर पहुंचे कचौड़ी गली। मेमसाब बोलीं, “मुझे सिर्फ ‘हाइजीनिक’ और बिना ऑयल वाला फ़ूड चाहिए।”
कलुआ गुरु ने कहा, “हाँ मेमसाब, तुम्हारे लिए एकदम स्पेशल ‘उबला हुआ’ खाना लाते हैं।” वो उनको ले गए सीधे ‘राम भंडार’। वहां भाई साहब, ऐसी भीड़ की आदमी आदमी को कुचल दे। कलुआ गुरु ने दो पत्तल गरम-गरम, देसी घी में तरबतर कचौड़ी और ऊपर से तीखी सब्जी उठाई और मेमसाब के हाथ में दे दी।
मेमसाब पत्तल देखकर बोलीं, “ओह गॉड, इसमें तो बहुत ऑयल है, मैं बीमार हो जाउंगी!”
कलुआ गुरु बोले, “अरे खाओ मेमसाब! विधाता जब बुद्धि और स्वाद बांट रहे थे, तो क्या तुम इंग्लैंड में बैठ के उबला आलू छील रही थीं? ज्यादा भबभुआओ मत, एक निवाला मारो!”
मेमसाब ने डरते-डरते एक बाइट ली। भाई साहब, तीखा और चटपटा स्वाद जैसे ही उनके दिमाग में चढ़ा, उनकी आँखों से आंसू आ गए, लेकिन हाथ नहीं रुका। वो पत्तल चाटने लगीं और बोलीं, “ओह माय गॉड! ये तो बहुत डिलीसियस है! इसके सामने तो हमारा पिज्जा-बर्गर सब बकवास है!”
शाम को मेमसाब दशाश्वमेध घाट पर आरती देखने पहुंचीं। वहां एक पंडा जी त्रिपंड लगाए बैठे थे। उन्होंने मेमसाब का आईफोन देखा तो भांप गए कि तगड़ी मुर्गी है। उन्होंने मेमसाब को बुलाया, “आओ बच्चा, तुम्हारी कुंडली में भारी दोष है। डॉलर निकालो, पूजा करनी पड़ेगी।”
मेमसाब डर गईं, “दोष? कैसा दोष
पंडा जी बोले, “तुम्हारे देश का राजा जो है ना, उसकी साढ़ेसाती तुम पर चल रही है। पांच हजार दो, अभी कटवा देते हैं।”
मेमसाब बैग से पैसे निकालने ही वाली थीं कि पीछे से कलुआ गुरु आ गए। उन्होंने पंडा जी के पैर छुए और बोले, “प्रणाम गुरु! काहे गरीब मेमसाब को लपेट रहे हो? इनके आने से पहले ही लंका पे ढोल बाजत हौ! हमको पता है कि पूजा का रेट पांच सौ रुपया है।”
पंडा जी हंस पड़े, “अरे कलुआ! तुम साले महा ‘गुरुघंटाल’ हो, अपनी ही बिरादरी का धंधा चौपट कर रहे हो!” मेमसाब हैरान होकर देखने लगीं कि यहाँ तो ठगी में भी लोग एक-दूसरे को ‘गुरु’ बोल के हंस रहे हैं।
आरती खत्म हुई तो मेमसाब बोलीं, “कलुआ, कचौड़ी तो पच गई, अब कुछ तीखा-चटपटा हो जाए।”
कलुआ गुरु उनको लेकर पहुंचे गोदौलिया के दीना चाट भंडार पर। वहां तवे पर देसी घी में टमाटर, आलू और खट्टी-मीठी चटनियों का महासंग्राम चल रहा था। पंडा जी ने मिट्टी के कुल्हड़ में गरमा-गरम टमाटर चाट निकाला, ऊपर से काजू की कतरन, बारीक सेव और शुद्ध देसी घी का तैरता हुआ चम्मच मार के मेमसाब को थमा दिया।
मेमसाब अचरज से बोलीं, “अरे! तुम लोग चाट के ऊपर शक्कर का सिरप (चाशनी) डाल रहे हो? आर यू सीरियस? साल्ट और शुगर का मिक्सचर?”
कलुआ गुरु बोले, “अरे मेमसाब! तुम इंग्लैंड का खोपड़ा यहाँ मत लगाओ। चुपचाप एक चम्मच अंदर लो।”
मेमसाब ने जैसे ही पहला चम्मच मुंह में डाला, दो सेकंड के लिए उनकी आँखें फटी की फटी रह गईं। मुंह से धुआं फेंकते हुए बोलीं, “ओह माय गॉड! खट्टा, मीठा, तीखा, क्रंची… सब एक साथ! ये कोई नॉर्मल फूड नहीं है, ये तो स्वाद का एटम बम है!” वो गरम-गरम कुल्हड़ को उंगलियों से चाटने लगीं।
कलुआ गुरु हंसकर बोले, “इसी को तो कहते हैं गुरु—’चना चबैना गंगा तीर, घर में रहें तो कौने पीर’। जब तक ये चाट का कुल्हड़ हाथ में है, दुनिया का सारा डिप्रेशन गायब!”
रात के ग्यारह बज रहे थे। मेमसाब का पूरा ‘विदेशी चश्मा’ उतर चुका था। बूट उतार के वो अस्सी की सीढ़ी पर सुखासन में बैठ चुकी थीं। कलुआ गुरु ने आखिरी दांव खेला और एक कड़क ‘मगही पान’ मेमसाब के मुंह में ठूंस दिया।
मेमसाब का मुंह पूरा लाल हो गया। दो मिनट तक वो कुछ बोल नहीं पाईं, बस आंखें बड़ी-बड़ी करके रस चूसती रहीं। फिर उन्होंने घाट के कोने में जाकर खांटी बनारसी स्टाइल में ‘पिचकारी’ मारी, अपना आईफोन निकाला और इंस्टाग्राम पर लाइव आकर बोलीं:
“फ्रेंड्स! लंदन-वंदन सब धोखा है। अगर जिंदगी में असली मोक्ष चाहिए, तो बनारस आओ, दीना की टमाटर चाट दबाओ, और यहाँ के गुरुघंटालों के साथ घाट पर बैठ के बोलो हर हर महादेव



















