
आरती ब्यूरो चीफ के कलम से बुढ़ापा कितना खराब होता है उसका अंदाज़ा इन्हें देखकर लगाइए। करोड़पति थी ये। मगर ज़िंदगी के आखिरी सालों में एकदम तन्हा, एकदम अकेली। दूसरों पर निर्भर। जिस फ़िल्म इंडस्ट्री में सालों गुज़ार दिए, वहीं से आखिरी वक्त पर कोई पूछने नहीं आया।
जबकी कहां एक वक्त पर फ़िल्म इंडस्ट्री की चहेती मां व दादी हुआ करती थी ये। आप इन्हें पहचान रहे होंगे। जी हां, वही हैं ये। वक्त फ़िल्म के मशहूर गीत “ऐ मेरी ज़ोहराज़बी तुझे मालूम नहीं” में खुशी से ढोलक बजाती दिखने वाली बलराज साहनी जी के किरदार की पत्नी बनी, एक्ट्रेस अचला सचदेव।
आज अचला सचदेव जी की पुण्यतिथि है। 30 अप्रैल साल 2012 को अचला सचदेव जी का देहांत हुआ था। उम्र थी इनकी तब 91 साल। उस वक्त ये ज़िंदगी में तन्हा थी। बेटा विदेश में रहता था। एक दिन अचला जी अपने किचन में फिसल गई और घायल हो गई। बुरी तरह घायल हुई थी उस दुर्घटना में अचला सचदेव जी।
सिर और पैर में काफ़ी चोटें आई थी इनके। पैर में तो फ्रैक्चर तक हो गया था। कुछ लोगों ने हॉस्पिटल में एडमिट कराया। जांच की गई तो पता चला कि सिर में खून के थक्के जम गए हैं। किस्मत इतनी खराब कि जब अस्पताल में इलाज हो रहा था तभी पैरालाइज़ भी हो गया। और आंखों की रोशनी भी खो गई।
ऐसी स्थिति में एक 91 साल की बूढ़ी महिला भला कहां तक ज़िंदगी के लिए संघर्ष करती? आखिरकार सांसों ने साथ छोड़ दिया। अचला सचदेव जी की मृत्यु हो गई। इनकी मौत की खबर मीडिया में आई तो इनके बारे में काफ़ी बात हुई। मगर फ़िल्म इंडस्ट्री से किसी ने इनके आखिरी सफ़र में शामिल होने की ज़हमत नहीं उठाई।
सोशल मीडिया के माध्यम से अमिताभ बच्चन व एकता कपूर ने इन्हें याद किया था। हो सकता है और कुछ सेलेब्स ने भी इन्हें तब याद किया हो। मगर अधिकतर फ़िल्म सितारे ऐसे अनजान बने रहे जैसे अचला सचदेव कभी कुछ थी ही नहीं।
उन सितारों की चुप्पी ने तब भी साबित किया था कि फ़िल्म इंडस्ट्री अंधेरे की एक दुनिया है। जहां अगर किसी सितारे की चमक धूमिल पड़ी तो कोई उसे पूछने वाला नहीं होता। अचला सचदेव जी की अंतिम यात्रा में महज़ 40 लोग आए थे।
एक अच्छी बात ये रही कि इनका बेटा ज्योतिन भी इन्हें आखिरी विदाई देने अमेरिका से आ गया था। बेटा ना आता तो कहानी और दर्दभरी हो जाती। अचला सचदेव जी को किस्सा टीवी का नमन। शत शत नमन। ईश्वर उन्हें अपने सदचरणों में स्थान दें।


















