
अविनाश ब्यूरो चीफ की कलम से पहली फोटो में जो #होटल है वो सालासर ##मंदिर के मुख्य द्वार के पास सड़क पर है,ये #पुजारी परिवार का है इस होटल में पीछे से एक #सीढ़ी है जो सीधे #मंदिर में निकलती है जो दुसरी फोटो में आपको दिख रही है..
मतलब #यात्री पुजारियों के #होटल में #ठहरे तो भी #दर्शन की #सहुलियत दी जाती है,फिर अन्य #फोटो में आप देख सकते हैं, मंदिर के अंदर #प्रसाद की #दुकान है #चकी #चुरमें में #घी तो वहीं #नकली घी की फैक्ट्री वाला #इस्तेमाल होता है और भाव ५ रुपये किलो प्रति मिठाई का, लेकिन मंदिर के अंदर से सवामणी प्रसाद लोगे तो #स्कीम है साथ में #वीआईपी दर्शन #फ्री है,यहां पुजारी #हलवाई और #मिठाई वाले बन गये, मंदिर से होने वाली #कमाई का पैसा दुसरो के पास क्यों जाये, #पुजारी_परिवार के पास ही रहना चाहिए..
इस तरह एक तस्वीर में #मुंडन_झडुला है ये काम #परम्परागत तो #नाई का होता है लेकिन ये काम भी पुजारी परिवार ही करता है😂, बच्चे के #मुंडन के ११ सौ लेकर ११हजार तक पैसे नाई को क्यों मिले इसलिए लालची पुजारी नाई भी बन गये..
फिर एक फ़ोटो में आप टिकट काउंटर देख सकते हैं,तीन श्रेणी के टिकट मिलते हैं, लाईन वाइज व दर्शन वाइज श्रेणी अलग अलग है, अच्छा ये टिकट किसी को भी घर नहीं लाने देते,अंदर एक सरदार गार्ड खड़ा है ,वह टिकट चैक करता है और दर्शन के लिए आगे जाने देता है व टिकट अपने पास रख लेता है
मैं इस मंदिर की वीआईपी दर्शन का सालों से विरोध इसलिए कर रहा हूं की इस वीआईपी दर्शन के कारण विधर्मियों को हमारे धर्म पर अंगुली उठाने का मौका मिलता है, देखो सनातन धर्म में तो भगवान भी हैसियत देख कर दर्शन देते हैं..
और यही सब दिखाकर मिशनरी और मुल्ले गरीब हिंदूओं का धर्म परिवर्तन करा देते हैं..
भगवान सबके है वहां कोई वीआईपी लाईन नहीं होनी चाहिए, दर्शन की सहुलियत केवल वृद्ध, विकलांग या गर्भवती स्त्री होनी चाहिए वो भी फ्री ना की पैसा लेकर..
अगर सुरक्षा की दृष्टि कोई अति विशिष्ट व्यक्ति हैं तो उसे वीआईपी दर्शन करवाओ लेकिन ऐसा नहीं की टिकट लेकर कोई भी गर्भगृह के आगे से दर्शन करेगा और बाकी श्रद्धालु बाउंसरों से मार खाएंगे।


















