
रश्मी शर्मा ब्यूरो चीफ की कलम से किशनगंज के एसडीपीओ गौतम कुमार के घर नौकरानी का काम करती थी पारो। लेकिन पारो कोई साधारण गरीब औरत नहीं थी। उसके पास 35 लाख रुपये की महिंद्रा थार गाड़ी थी। उसी थार से वह रोज गौतम कुमार के सरकारी घर पर काम करने आती-जाती थी। कभी-कभी उसे सरकारी गाड़ी से भी घर छोड़ा जाता था। उसके पास रॉयल एनफील्ड बुलेट बाइक भी थी और पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर इलाके में उसके नाम पर एक करोड़ रुपये का आलीशान घर भी था।
यह सब तब सामने आया जब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने गौतम कुमार पर छापा मारा। जांच में पता चला कि गौतम कुमार ने 1994 में सब-इंस्पेक्टर बनकर नौकरी शुरू की थी। 32 साल की इस नौकरी में उन्होंने आय से बहुत ज्यादा संपत्ति जमा कर ली। EOU के अनुसार उनकी कुल अवैध संपत्ति लगभग 80 करोड़ रुपये की थी।
छापेमारी में कई बड़े खुलासे हुए। पूर्णिया में उनका चार मंजिला आलीशान बंगला मिला, जिसकी कीमत 2.5 करोड़ रुपये थी। इस बंगले की सजावट पर ही एक करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च हुए थे। 25 से ज्यादा जमीन के प्लॉट मिले, जो आवासीय और व्यावसायिक थे। 60 लाख रुपये के सोने-चांदी के गहने, महंगी घड़ियां, नकदी और लग्जरी गाड़ियां भी जब्त की गईं।
गौतम कुमार ने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ अपनी पत्नी (सरकारी टीचर) के नाम पर ही नहीं रखा था। उनकी कथित प्रेमिका शगुफ्ता शमीम, सास और नौकरानी पारो के नाम पर भी बेनामी संपत्ति थी। जांच टीम का कहना है कि पारो को गिफ्ट में गाड़ी, बाइक और पैसे दिए गए थे। एक नौकरानी के पास इतनी बड़ी संपत्ति और लग्जरी जीवन होना इस बात का सबूत है कि गौतम कुमार ने अपनी काली कमाई छुपाने के लिए पारो का नाम इस्तेमाल किया था।
यह मामला बिहार की नौकरशाही में फैले भ्रष्टाचार को साफ दिखाता है। एक तरफ आम बिहारी युवा पढ़-लिखकर भी मुश्किल से अच्छी नौकरी पाता है और कम पैसा कमाता है। दूसरी तरफ कुछ अधिकारी अपनी नौकरी के दौरान करोड़ों रुपये जमा कर लेते हैं और उसे परिवार, दोस्तों और यहां तक कि नौकरानी तक बांट देते हैं।
अब गौतम कुमार को एसडीपीओ पद से हटा दिया गया है और उनका निलंबन हो गया है। उनके और पारो के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए हैं। मामले में भ्रष्टाचार निवारण कानून और अन्य धाराओं में कार्रवाई चल रही है। जांच आगे बढ़ रही है और उम्मीद है कि और बड़े खुलासे होंगे।
यह कहानी सिर्फ एक अधिकारी की नहीं है। यह पूरे सिस्टम की है, जहां जवाबदेही कम होने से कुछ लोग अमीर बन जाते हैं, जबकि आम लोग गरीबी में संघर्ष करते रहते हैं। बिहार में ऐसे मामलों पर सख्ती जरूरी है ताकि सच्ची तरक्की हो सके।
¶


















