
अशोक ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट #धुरंधर 2 का आपने वो सीन तो देखा ही होगा जब….
पिन्दा बाथरूम में मरा पड़ा है और हमज़ा की @&@# पड़ी है कि अब तो सारा खेल खतम। सोंचिये कि अगर उस समय हमज़ा पकड़ा जाता तो क्या होता?
क्या फिर पाकिस्तान का मुस्ताबिल हिंदुस्तान लिख पाता? खैर इसपर बाद में बात करेंगे।
फिर सीन में एंट्री होती है आलम की। वो हमज़ा को पेनिक होते देखता है और फिर तुरंत ही सारी सिचुएशन समझ जाता है। और ये भी समझ जाता है कि उसको क्या करना है अब!
जिस तरह से वो काँच से बिना सोंचे अपने चेहरे पर घाव बनाता है….. यार मेरे लिए तो जैसे मेरा दिल ही चीर दिया उसने उसी काँच से।
फिर उसका हमज़ा को वहाँ से निकालना और सारा इल्जाम खुद पर ले लेना…. ताकि सारे प्लांस अपनी जगह पर चलते रहें, ताकि देश बचा रहे।
और उसकी आखिरी इच्छा क्या थी….. बरेली के उस जेबकतरे की आखिरी इच्छा थी कि बस उसका दोस्त हमज़ा उसे याद रखे, भले और किसी को पता न चले कि उसने अपनी जान देकर देश के लिए आखिर क्या कर दिया है।
गौरव गेरा उस सीन को लूट कर ले गए। वॉव!
ये तो खैर फिल्म थी, लेकिन सोंचिये कि असल में ऐसे न जाने कितने हैं, जिनका खून बहता है तो हमारी साँसें चलती हैं। जो अपने वतन से दूर इसलिए रहते हैं ताकि हम अपनों के साथ रह सकें। जो सिर्फ इसलिए गुमनामी की मौत मर जाते हैं ताकि हमारी और देश की साँसें चलती रहे।
सैल्यूट है भारत के हर उस असेट को, जिसे शायद हम कभी नही जान पायेंगे। लेकिन जो अपनी हर साँस को भारत पर वार चुका है।
सोंचिये आखिर ऐसी क्या भावना होती है जो एक जेबकतरे को ऐसा बना देती है।
ये होती है देशभक्ति! और कुछ लोग छोटी छोटी चीजों के लिए देश में उत्पात मचाने लगते हैं।
सोंचिये, हमको ऐसा खुश रखने की कुछ लोग कितनी बड़ी कीमत चुका रहे हैं!
और अब वो बात, जो मैंने ऊपर अधूरी छोड़ी थी। अगर हमज़ा पकड़ा जाता तो मिशन धुरंधर खतम था फिल्म में। फिल्म थी तो बच गया। लेकिन असल में हमारे कुछ राजनेताओं, संवैधानिक पद होल्ड करने वालों ने हमारे ऐसे ही न जाने कितने असेट्स की जानकारी दूसरे देशों को दे दी है। जिसके कारण न जाने कितने मिशन बीच में ही खतम हो गए होंगे।
सोंचिये कितना नुकसान हुआ होगा हमारे भारत को, और कितना फायदा हुआ होगा दुश्मनों को


















