
स्मार्ट सिटी तो बनती रहेगी पहले गड्ढों को तो भर दो*
*नए प्रोजेक्ट रोको, पहले सड़के सुधारों*
जयपुर ,(*सुशील एडिटर इन चीफ जयपुर*)राजधानी जयपुर जिसे स्मार्ट सिटी बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने हजारों करोड़ रुपये अकेले जयपुर पर ही व्यय कर दिए हैं ।आम जनता की गाढ़ी कमाई के दिए गए टैक्स के करोड़ों रुपए को अधिकारियों ने किस तरह और कहां-कहां खर्च कर दिए इसका केवल उन्हें ही पता है लेकिन अवाम को जयपुर स्मार्ट होता नजर नहीं दिख रहा क्यों कि आज भी नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण के साथ मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायतों का अंबार पहले की ही तरह लगा हुआ है।
वर्ष 2016 से शुरू किए गए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में कई बड़े बड़े वायदे आवाम से किए गए थे, अगर यह तमाम वायदे कड़ी मेहनत और ईमानदारी से पूरे कर लिए गए होते तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी का सपना आज काफी हद तक पूरा हो गया होता,लेकिन अफसोस जयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए कड़ी मेहनत नहीं की गई। वहीं पहले की तरह परेशानियां आज भी आमजन झेल रहा है खासकर सड़को पर हुए गड्ढों की तकलीफ जो पहले भी थी और आज भी जिंदा हैं यह जानलेवा बने हुए है, हैरानी होती है इनके लिए स्मार्ट सिटी अधिकारी बिल्कुल भी गम्भीर नहीं है । जयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने में जुटे अधिकारियों को स्मार्ट सिटी के सभी कार्यों को एक बार तो किनारे पर कर देना चाहिए और सिर्फ जयपुर शहर की सड़कों के गड्ढों को भरने और सड़को को दुरुस्त करने का ही कार्य शुरू कर देना चाहिए। आमजन देख रहा है कि जयपुर को स्मार्ट बनने की कोशिश जहां करनी चाहिए थी वहां बिल्कुल नहीं की गई। गुलाबी नगर की सड़क पर हो रहे गड्ढों से यहां के वाहन चालक बेहद दुखी है, मुख्य सड़कों को छोड़ दे तो आज अन्य सड़कों पर गड्ढों की भरमार है वह भी जानलेवा गड्ढों की। वाहन चालक इनमें निरंतर गिरकर घायल हो रहे हैं और उन्हें भी फिर भी नहीं भरा जा रहा सबसे दुखद तो यह है कि यातायात पुलिस की दुर्घटना शाखा के पुलिसकर्मी जो इन घायलों को घटनास्थल से उठाकर अस्पताल में पहुंचाते है वह भी इन गड्ढों को भरवाने के लिए नगर निगम अथवा जेडीए को लिखकर सचेत नहीं करते जिसके चलते वह गड्ढा यूं ही अपनी जगह सालों साल तक पड़ा रहता है और निर्दोष वाहन चालक इसमें गिरते – पड़ते रहते हैं जिनमें कुछ तो इनमें गिरकर असमय ही ऊपर पहुंच जाते हैं जयपुर में हुई कई जवान मौतों जिनमें कईयों दुल्हनों के हाथों की मेंहदी भी नहीं सूखती उन पर भी इन गड्ढों के कारण विधवा होने का ठप्पा लग जाता है और उसकी जिंदगी की खुशियां शुरू होने से पहले ही भारी दुखो वाली हो जाती है जिसके अकेले जिम्मेदार यह गड्ढे हैं जिन्हें भरने के लिए सरकार और अधिकारी बिल्कुल भी चिंतित और सक्रिय नहीं है। अब मानसून आने वाला है तब इन गड्ढों में गिरकर घायल होने वालों की तादाद भी बढ़ जाएगी क्यों की सड़कों पर पानी की निकासी सही नहीं होने के कारण यह गड्ढे वाहन चालकों को भरे पानी में नजर नहीं आते। हां इन दिनों में नगर निगम और जेडीए के अधिकारी कुछ समय के लिए जागते हैं और गड्ढों में लोगों के गिरने की खबरों को देखते हुए गड्ढे भरने का अभियान चलाते हैं , जिस अभियान की सांसे भी जल्द उखड़ जाती है। वैसे होना तो यह चाहिए कि जयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए नए प्रोजेक्टों को रोककर अगर उस रकम को शहर की सड़कों को सुधारने में लगाया जाए तो कायाकल्प हो सकता है और जयपुर शहर स्मार्ट लगने लगेगा और असली स्मार्ट सिटी वही है जहां सड़क हादसे नगण्य हो। वैसे हरियाणा सरकार ने सड़क के गड्ढों को लेकर एक ऐप बनाया हुआ है अगर कोई नागरिक उस पर गड्ढे की फोटो अपलोड कर सूचना देता है तो उसे नकद इनाम दिया जाता है सरकार की तरफ से।
*सुझाव:शहर की सड़कों पर गड्ढों को भरने के लिए जेडीए और नगर निगम को अपनी एक संयुक्त टीम बनानी चाहिए इसके लिए एक अलग विंग बनाई जा सकती है जिसमें सिर्फ गड्ढों को भरने और सड़क सुधार का ही कार्य हो और इसके लिए मजदूर और गड्ढे भरने के काम आने वाली सारी सामग्री का गोदाम भी अलग हो जहां सरकारी अवकाश के दिन भी सामग्री निकाली जा सके।इस विंग का अलग हेल्पलाइन नंबर भी होना चाहिए जहां आम जन आसानी से शिकायत करें जो की सीधी इस विंग तक पहुंचे ना कि अन्य अधिकारियों तक घूमती फिरती हुई पहुंचे। राज्य सरकार को आमजन की सुरक्षा के लिए यह कदम उठा ही लेने चाहिए ताकि दोपहिया वाहन चालक और अन्य पैदल चल रहे लोग वाहनों से टकराने से बचे और सभी अपने घर अपनों के बीच सुरक्षित पहुंच सके।*


















