

मोहनी ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट खासपुर। इसी गांव में मीनाक्षी देवी रहती थी, जो पैसे से एक सरकारी स्कूल की शिक्षिका थी। वह हर सुबह 8:00 अपने स्कूल जाती और शाम को लौटकर गांव के उन बच्चों को मुफ्त में ट्यूशन पढ़ती थी जो फीस देने में असमर्थ थे। उनकी इसी निस्वार्थ सेवा के कारण पूरा गांव उनका सम्मान करता था।
मीनाक्षी के परिवार में उनके पति रमेश थे, जो दिल्ली में नौकरी करते थे और महीने में कुछ ही दिन घर आ पाए थे। घर पर उनकी बुद्धि स सुधा देवी और एक छोटी नंद जिज्ञासा रहती थी। जिज्ञासा कॉलेज की छात्रा थी और अपनी पढ़ाई में बहुत होनहार थी।
इसी घर के पड़ोस में विनोद नाम का एक युवक रहता था, जो ऑटो चलता था। विनोद पिछले 1 साल से मीनाक्षी को स्कूल छोड़ने और वापस लाने का काम कर रहा था। समय के साथ विनोद ने उसे परिवार का अटूट विश्वास जीत लिया था। जिज्ञासा उसे अपना भाई मानती थी और हर साल उसकी कलाई पर राखी बांधती थी, जबकि विनोद मीनाक्षी को “भाभी” का कर पुकारता था। लेकिन किसी को नहीं पता था कि इस भरोसे के पीछे कितनी भयानक सच छपी थी।
अध्याय 2: लालच और बुरी नीयत का उदय
दिसंबर 2025 की शुरुआत में विनोद की नियत में खोट आने लगा 10 दिसंबर को उसने मीनाक्षी से ₹5,000 उधर मांगे। मीनाक्षी ने मजबूरी बताते हुए कहा कि वेतन मिलते ही वह उसे पैसे दे देगी। विनोद को लगा कि उसके पास पैसे हैं पर वह जानबूझकर मना कर रही है। यह छोटी सी बात उसके मन में कड़वाहट भर गई।
15 दिसंबर का दिन इस परिवार के लिए दुर्भाग्य लेकर आया। मीनाक्षी और सुधा देवी को शहर खरीददारी के लिए जाना था। विनोद का फोन न लगने पर वे दूसरे ऑटो से चली गई। घर पर जिज्ञासा अकेली थी। कुछ देर बाद विनोद अपना ऑटो लेकर वहां पहुंचा। जब उसने देखा की जिज्ञासा घर पर अकेली है और उसने घर के आरामदायक कपड़े पहने हुए हैं, तो उसकी नीयत डगमगा गई।
जिज्ञासा ने उसे बताया कि वह आधे घंटे में कॉलेज जाने वाली है और आज वह उसके ऑटो से ही जाएगी। विनोद के दिमाग में शैतानी विचार कौधने लगे। वह तुरंत वहां से निकाला और अपने दोस्त कर्मवीर को फोन किया। उसने कर्मवीर को पूरी बात बताई और उसे इस को कुकृत्य में शामिल होने के लिए उकसाया। कर्मवीर ने पहले तो उसे याद दिलाया कि वह उसकी बहन जैसी है। फिर उसके साथ इस कृत्य में शामिल हो गया।


















