
“अभी ट्रेन से उतरो! बिना टिकट के यहाँ कोई सपना पूरा नहीं होता!”
सुरक्षाकर्मी की आवाज़ ने अभय को झकझोर दिया। बिहार के इस गरीब लड़के ने अपनी फटी झोली में चमत्कार ढूँढा, पर टिकट और माँ के गहने बेचकर मिले पैसे चोरी हो चुके थे। सामने टीटी रिया चौहान खड़ी थीं, जिनकी नज़र अभय के पुराने यूपीएससी (UPSC) एडमिट कार्ड पर टिकी थी।
“मैडम, खुदा के लिए… अगर आज मैं दिल्ली नहीं पहुँचा, तो मेरे परिवार की आखिरी उम्मीद मर जाएगी!” – अभय फूट-फूट कर रोने लगा।
रिया खामोश रहीं, पर जब उनकी नज़र अभय की माँ के उस पुराने पत्र पर पड़ी, तो उनका दिल पिघल गया। उन्होंने अपना पर्स निकाला और कहा: “इसका दिल्ली तक का टिकट बनाओ। इसके पैसे मैं भरूँगी!”
पूरा डिब्बा सन्न रह गया। किसी को नहीं पता था कि यह एक टिकट भारत के अगले बड़े आईएएस (IAS) अफसर की किस्मत लिख रहा है। क्या अभय परीक्षा पास कर पाएगा? और एक साल बाद वह रिया से किस रूप में मिलेगा


















