
अशोक ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट वेस्टइंडीज के खिलाफ सुपर-8 के इस कांटे के मुकाबले में शिवम दुबे ने मात्र 4 गेंदों पर नाबाद 8 रन बनाए, लेकिन इन रनों की अहमियत किसी 50 या 100 रन से भी कहीं ज्यादा बड़ी है। जिस समय हार्दिक पांड्या का विकेट गिरा और टीम इंडिया पर दबाव बढ़ रहा था, उस नाजुक मौके पर दुबे ने क्रीज पर कदम रखते ही चौकों की झड़ी लगा दी। उनके ये 8 रन केवल स्कोरबोर्ड का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि उस ‘प्रेशर कुकर’ वाली स्थिति में भारत की जीत की राह आसान करने वाले अनमोल रन थे।
अक्सर लोग केवल बड़े शतकों की चर्चा करते हैं, लेकिन एक असली क्रिकेट प्रशंसक जानता है कि अंतिम ओवरों में आकर पहली ही गेंद से प्रहार करना कितना कठिन होता है। दुबे ने अपने शांत स्वभाव और आक्रामक बल्लेबाजी से यह सुनिश्चित किया कि संजू सैमसन पर से दबाव कम हो और टीम इंडिया सुरक्षित तरीके से लक्ष्य की ओर बढ़े। उनके बल्ले से निकले ये चंद रन ही थे जिन्होंने वेस्टइंडीज के गेंदबाजों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया और भारत को सेमीफाइनल का रास्ता दिखाया।
शिवम दुबे भारतीय क्रिकेट के वो गुमनाम योद्धा हैं जो बिना किसी शोर-शराबे के अपना काम बखूबी अंजाम देते हैं। 5 मार्च को वानखेड़े में इंग्लैंड के खिलाफ होने वाले सेमीफाइनल से पहले दुबे का यह आत्मविश्वास टीम इंडिया के लिए एक बहुत बड़ा प्लस पॉइंट है। तारीफ भले ही कम मिले, लेकिन संजू सैमसन के साथ अंत तक खड़े रहकर जीत पक्की करने वाले दुबे की इस छोटी मगर प्रभावशाली पारी को इतिहास हमेशा याद रख


















