
संदीप सबरवल ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
भारत की रक्षा तलवार और आजाद जैसे पिस्तौल चलाने वालों ने ही की है। इतिहास तलवार और पिस्तौल चलाने वालों ने ही लिखा है। बाकी कलम चलाने वालों ने तो अकबर और सिकंदर को भी महान लिख दिया।
इतिहास यदि कलम से लिखी जा सकती तो महाराणा प्रताप पृथ्वीराज चौहान आजाद मंगल पांडे रानी लक्ष्मी जी बाई उदा देवी पासी जी भूरा सिंह वाल्मीकि जी तलवार और पिस्टल ना उठाते बल्कि वो भी कलम उठाते!
जब इतिहास लिखने वाले राष्ट्रप्रेमी तलवार और पिस्टल उठाते है तब कलम उठाने राष्ट्र में पैदा होते है।
यदि रक्षक ना हो किसी राष्ट्र में तो कलम उठाने वाले अपनी माता के गर्व से बाहर नही आएंगे।
कलम उठाने वाले तब पैदा होते है जब पहले से बंदूक और तलवार उठाकर राष्ट्र की रक्षा करने वाले 24 घंटे कलम वालो की रक्षा में अपना बलिदान देने के तैयार रहते है।
अब आगे सत्यता पर आते है भूमिका बहुत बन गई है👉 जबकि सिकंदर इतना महान था, उसको भारत के एक वीर योद्धा पोरस ने हराकर हाथी से बांधकर घसीटते हुए अपने महल तक ले गया था और सिकंदर से पूछा, तुम्हें कौन सी सजा दी जाए। तो सिकंदर ने कहा, मेरी जान छोड़ दो, मैं आपसे जान की भीख मांगता हूं।
तो भारतीय राजा पोरस ने सिकंदर को छोड़ दिया क्योंकि भारत की संस्कृति थी कि सामने वाला दुश्मन यदि शस्त्र त्यागकर सरेंडर कर दे और वो अपनी जान की भीख मांगे तो उसकी जान छोड़ दो।
लेकिन कलम वालों ने इसको उल्टा लिख दिया कि सिकंदर ने पोरस को हराया।
जबकि आप खुद सोचिए सिकंदर जो विश्व विजय का सपना लेकर चला था और वह इतना क्रूर था कि यदि वो पोरस को हरा देता तो क्या वो पोरस को माफ करके वापस लौट जाता, क्या ये संभव है।
जबकि यूरोप से मध्य एशिया तक किसी को माफ नहीं किया। उसका सीधा सा फंडा या तो उसके अधीन हो जाओ या वो मार देता था।
लेकिन आप सोचो कि कलम वालों ने क्या जाहिलियत की है कि सिकंदर का विश्व विजय का सपना था, उसने पोरस को हरा भी दिया था और फिर वो वहीं से वापस लौट गया।
अबे मूर्खों यदि सिकंदर पोरस को हराया होता तो वह वापस ना जाता बल्कि और आगे बढ़ता।
आप तस्वीर में एक सिक्का देख रहे हैं जिसमें साफ प्रमाण मौजूद है कि सिकंदर को भारतीय राजा पोरस हराने के बाद हाथी से बांधकर घसीटते हुए लेकर जा रहा है।
आप अपनी तर्क और बुद्धि से जवाब देना कि सिकंदर ने पोरस को हराया था या ये नकली काल्पनिक कहानियों को आप मानते हो कि सिकंदर ने पोरस को हरा दिया था।
यदि मेरे पास दो ऑप्शन हो कि एक तरफ राष्ट्र की रक्षा में तलवार और बंदूक उठाने वाले हो और दूसरी तरफ नीला कोट पेंट पहनकर फर्जी सबको आजादी दिलवाने वाले अंग्रेजो के नौकर हो – दोनों में से किसी का एक सम्मान करना हो तो मैं मात्र और मात्र राष्ट्र के रक्षक तलवार और बंदूक उठाने वालों का ही करूँगी ना की कोट पैन्ट वाले कलम उठाने वाले का!



















