
अतुल श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
लखनऊ – उत्तर प्रदेश की राजधानी है. कोचिंग सेंटर में आग लगी 15 बच्चे जल कर मर गए. मासूम बच्चे अपने घर फ़ोन कर तड़पते रहे कि बचा लो – उन्हें बचाया न जा सका. अवैध बिल्डिंग थी. अग्नि प्रबंधन नहीं था. पचासों ख़ामियाँ निकल आ रही हैं.
होना क्या है? मृतक को दो लाख मुआवजा. बच्चे हैं, भावनाएं होंगी तो पाँच लाख दे दिया जाएगा. बिल्डिंग का मालिक यदि वोट वाले दायरे में फिट बैठता है तो बुलडोजर चल जाएगा नहीं तो समर्थक सिद्ध कर देंगे कि गलती जनता की ही है कि ऐसी जगह बच्चे क्यों भेजती है. चाचा नेहरू के जमाने से ये चलता आया है. गलती नेहरू की है. हो सकता है मरने वालों में कोई पाकिस्तानी निकल आए, फिर तो लाटरी है.
थोड़े बहुत वायदे भी किए जायेंगे. धन्यवाद बोला जाएगा कि माननीय जी बिजी थे फिर भी दुर्घटना पर देखने आए. और तो और सहानुभूति भी व्यक्त की. यहाँ तक कह दिया दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. इससे ज़्यादा क्या चाहिए.
शहर की अन्य बिल्डिंग्स पर फ़िलहाल रिश्वत का रेट बढ़ जाएगा. जो नहीं दे पायेंगे वह जब्त हो जायेंगी. वह एक्शन कहलायेगा. फिर उन्हें दुगनी रिश्वत देना पड़ेगी. यह सब बंदर बांट नीचे से ऊपर तक होगी.
ऐसी घटनाएं हर सप्ताह होती हैं, होती रहती हैं. सवा अरब का देश है. हर सप्ताह सौ पचास मर गए जल गए डूब गए तो क्या हुआ. बहुत ज़्यादा हुआ तो दिखाने के लिए किसी सरकारी अधिकारी को सस्पेंड भी कर दिया जाएगा. अभी कुछ समय पूर्व हज़रतगंज में हुवे एक ऐसे ही हादसे में तो कई लोगों को सस्पेंड तक किया गया था – पूरा एक सप्ताह के लिए. तब तक ख़बर ठंडी. फिर कहीं कोई और बिल्डिंग गिरेगी फोकस उधर शिफ्ट हो जाएगा, इधर वालों की घर वापसी. यही जीवन की क़ीमत है. दो लाख रुपया मुआवजा और दोषी को एक सप्ताह की पेड वेकेशन.



















