
पअनीता ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट

ढ़ाई के लिए हॉस्टल भेजी गईं कुछ छात्राएँ जब शिक्षा और करियर के बजाय बंद कमरों में शराब, पार्टियों और दिखावे की दुनिया में खो जाती हैं, तो सबसे बड़ा सवाल उनके भविष्य से ज़्यादा उन माता-पिता की मेहनत और भरोसे पर उठता है, जो अपनी ज़रूरतें काटकर बच्चों के सपनों को पूरा करने की कोशिश करते हैं।
हॉस्टल का मकसद स्वतंत्रता के साथ ज़िम्मेदारी सीखना होता है, न कि उस आज़ादी को लापरवाही और अय्याशी में बदल देना।
अगर पढ़ाई सिर्फ एक बहाना बन जाए और समय, पैसा और भरोसा केवल मौज-मस्ती में खर्च होने लगे, तो यह न केवल अपने भविष्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि उन माता-पिता के त्याग का भी अपमान है, जो हर महीने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए भेजते हैं।
आज़ादी का अर्थ अनुशासन खो देना नहीं, बल्कि अपने फैसलों की ज़िम्मेदारी लेना है।



















