
अनीता पारीक ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
हाल ही में ऐसी घटनाएँ सामने आई हैं जिन्होंने मरीजों, विशेषकर महिलाओं और किशोरियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। ऐसे मामलों से हमें सबक लेने की आवश्यकता है ताकि भविष्य में किसी भी मरीज को असहज या असुरक्षित महसूस न करना पड़े।
हर महिला मरीज, चाहे उसकी उम्र 5 वर्ष हो, 15 वर्ष हो या 50 वर्ष, जब भी किसी पुरुष डॉक्टर द्वारा शारीरिक परीक्षण (Examination) किया जाए, तो वहाँ एक महिला उपस्थित अवश्य होनी चाहिए। वह महिला डॉक्टर, नर्स, वार्ड अटेंडेंट या कोई अधिकृत महिला स्टाफ हो सकती है। इसे चिकित्सा भाषा में “चैपरोन” (Chaperone) की उपस्थिति कहा जाता है।
यह व्यवस्था केवल मरीज की सुरक्षा के लिए ही नहीं, बल्कि डॉक्टर की सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए भी अत्यंत आवश्यक है। क्योंकि गलतफहमियाँ, आरोप या किसी भी प्रकार की असुविधाजनक स्थिति दोनों पक्षों के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
मैं सभी अभिभावकों, महिलाओं और परिवारों से निवेदन करती हूँ कि यदि आपकी बेटी, बहन, पत्नी या कोई भी महिला मरीज जांच के लिए जा रही है, तो यह सुनिश्चित करें कि जांच के दौरान एक महिला स्टाफ की उपस्थिति हो। यदि ऐसा नहीं है तो विनम्रता से अपनी बात रखें और अनुरोध करें कि किसी महिला स्टाफ को बुलाया जाए। यह आपका अधिकार है।
किसी भी सम्मानित और जिम्मेदार डॉक्टर को इस अनुरोध से कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। चिकित्सा व्यवस्था का उद्देश्य मरीज को सुरक्षित, सम्मानजनक और विश्वासपूर्ण वातावरण देना है।
याद रखिए—
जागरूक मरीज और जागरूक परिवार ही सुरक्षित समाज की नींव हैं।
बाद में पछताने से बेहतर है कि पहले ही अपनी सुरक्षा और अधिकारों के प्रति सजग रहें। अपनी बात कहने में संकोच न करें। यदि आपको किसी व्यवस्था पर आपत्ति है, तो उसे सामने रखें। आपकी सुरक्षा, आपकी गरिमा और आपका विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है।
आइए, हम सब मिलकर ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था का समर्थन करें जहाँ सम्मान, सुरक्षा, पारदर्शिता और विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता हों।



















