
सुशील एडिटर इन चीफ के कलम से डॉ. सोमदेव (सोनदेव) बंसल, जो जयपुर के निविक अस्पताल (Nivik Hospital) के संचालक हैं, जिस पर गंभीर आरोप लगा है कि चिकित्सा के नाम पर मौत का खेल खेला है इस ने पुलिस को जांच करने देनी चाहिए जिससे भविष्य में कोई भी डॉक्टर गलती ना करें मगर इस डॉक्टर को बचाने के लिए पूरे राजस्थान के डॉक्टर आज सड़क पर है अगर इसी तरह संगठन का गलत फायदा उठाते रहे तो वह दिन दूर नहीं जो हर निजी अस्पताल में मौत का नंगा नाच खुले आम होगा
अधिकतर राजस्थान में निजी चिकित्सालय राजनेताओं के हैं
राजस्थान में चिकित्सा व्यवस्था पर गहराया संकट
राजधानी जयपुर के निविक अस्पताल के संचालक डॉ. सोमदेव बंसल की गिरफ्तारी के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। एक तरफ जहां गंभीर आरोप लगे हैं, वहीं दूसरी तरफ निजी अस्पतालों की हड़ताल ने आम जनता की मुश्किलों को बढ़ा दिया है।
प्रकरण की जड़: डॉ. सोमदेव बंसल पर एक अधिवक्ता की माता के इलाज में लापरवाही और करोड़ों के RGHS घोटाले के आरोप हैं।
हड़ताल का प्रभाव: राजस्थान मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर निजी अस्पतालों ने 24 घंटे के लिए स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी हैं। सरकारी अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है।
जनता का सवाल: क्या किसी आरोपी डॉक्टर की गिरफ्तारी के विरोध में प्रदेश की पूरी चिकित्सा व्यवस्था को बंधक बनाना न्यायोचित है?
पुलिस की कार्रवाई: मानसरोवर थाना पुलिस साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है, जबकि डॉक्टर संघ इसे ‘बिना बोर्ड जांच’ के की गई अवैध गिरफ्तारी बता रहा है।
3. वकीलों और डॉक्टरों का प्रदर्शन
इस मामले ने काफी तूल पकड़ा है:
वकीलों का विरोध: अधिवक्ता की मां की मौत के बाद जयपुर में वकीलों ने डॉ. बंसल की गिरफ्तारी की मांग को लेकर हाई कोर्ट के बाहर विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम किया था।
चिकित्सकों की हड़ताल: डॉ. बंसल की गिरफ्तारी के विरोध में IMA (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) राजस्थान ने नाराजगी जताई है। इसके विरोध में निजी अस्पतालों ने 24 घंटे के शटडाउन का ऐलान किया है (14-15 अप्रैल 2026 तक), जिससे स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।



















