
अशोक कुमार ब्यूरो चीफ दिल्ली का कलम से
केजरीवाल सोच रहे थे कि न्यायालय में भी उसकी नौटंकी चलेगी पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उसकी बत्ती गुल कर दी कि हकला हकला कर दो लाइन ही बोल पाया , क़ानून जानता नहीं, अंग्रेजी में हाथ तंग हैं इसलिए बीच में हिन्दी घुसानी पड़ी…
ये वही केजरीवाल है जो कहता था इससे ज्यादा पढ़ा लिखा कोई नहीं ….आज इंग्लिश बोलने में इसको परेशानी है।
लगता है राजनीति में इसके अंत की शुरुआत हो चुकी है। पंजाब को कंगाल होने की कगार पे ला दिया। जनता जवाब देगी। इसका मुंह देखके लगता है खजाना लूट चुका है। बरी होने के लिए बोरे खर्च किए और नतीजा वही। अब सिंघवी की फीस देने की औखत नहीं रही।
नौटंकी बाज कोर्ट रूम में भी बाज नहीं आ रहा कोर्ट रूम में भी रायता फैलाने की कोशिश कर रहा है….
पहली नजर में ये अहंकारी इस भीड़ में दिख ही नहीं रहा है, आम आदमी पार्टी को अपने बजट में इस साढ़े चार फुटिया के लिए एक स्टूल का प्रबंध भी रखना चाहिए ।
तुषार मेहता ने पूरे पेच कस मारे इसके । उन्होंने केजरीवाल की नौटंकी को “theatrics” कहा,
कहा कोर्ट कोई ड्रामा थिएटर नहीं है बेबुनियाद आरोपों का करियर बनाने वालों पर तंज कसा, कहा कि अगर खुद बहस करना है तो वकील को हमेशा के लिए डिस्चार्ज करो और पूरा केस खुद ही लड़ो।
13 अप्रैल 2026 को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ही केस सुनेंगी। CJ पहले ही ट्रांसफर से मना कर चुके हैं। रिक्यूसल एप्लीकेशन जज खुद तय करेगी – और जज महोदया ने इसे रिकॉर्ड पर ले लिया है, यानी वो खुद ही फैसला करेंगी। आमतौर पर ऐसे बेबुनियाद रिक्यूसल ठुकराए जाते हैं। SC की रिट भी वापस ले ली गई है। इसलिए मैडम जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ही पूरा केस सुनेंगी और CBI की चुनौती पर फैसला देंगी। केजरीवाल की चाल फिर फेल हो चुकी है। घोटाला बाज़ अब बच नहीं पाएगा!



















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