
अशोक ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट भारतीय रेलवे की 3rd AC कभी मिडिल क्लास यात्रियों के लिए आरामदायक और सुरक्षित सफर का भरोसा हुआ करती थी। लोग थोड़े ज्यादा पैसे देकर यह सोचकर टिकट लेते थे कि सफर भी आराम से होगा और व्यवस्था भी ठीक रहेगी।
लेकिन आज कई ट्रेनों में 3rd AC का हाल ऐसा हो गया है कि यात्री खुद सवाल पूछ रहे हैं — क्या हमने AC का किराया दिया है या जनरल बोगी का?
सबसे बड़ी समस्या है बिना टिकट और अनधिकृत लोगों का प्रवेश। यात्रियों का कहना है कि 3rd AC में अब किन्नर, भिखारी, गुटखा और छोटे-मोटे सामान बेचने वाले लोग आसानी से घुस जाते हैं। कई बार किन्नर जबरदस्ती पैसे मांगते हैं और इंकार करने पर दबाव या बदसलूकी तक की स्थिति बन जाती है। जिस कोच में यात्रियों को सुरक्षित और शांत माहौल मिलना चाहिए, वहां कई बार डर और असहजता का माहौल बन जाता है।
यात्रियों की शिकायत यह भी है कि कुछ जगहों पर बिना टिकट वालों को पैसे लेकर AC में सीट दे दी जाती है। यानी जिसने महीनों पहले टिकट बुक किया और पूरा किराया दिया, वही व्यक्ति अपनी ही सीट के आसपास भीड़ और अव्यवस्था झेलने को मजबूर हो जाता है। यह स्थिति न केवल नियमों का उल्लंघन है बल्कि ईमानदार यात्रियों के साथ अन्याय भी है।
एक यात्री की नाराज़गी इन शब्दों में सामने आती है —
“3rd AC को जनरल बना दिया है। किन्नर, भिखारी, गुटखा बेचने वाले सब घुस जाते हैं। किन्नर जबरदस्ती गुंडई करके पैसा लेकर जाते हैं। बिना टिकट वालों को पैसा लेकर AC में सीट दे दिया जाता है। यही 3rd AC का हाल हो गया है।”
यह सिर्फ एक व्यक्ति की शिकायत नहीं, बल्कि हजारों यात्रियों की साझा पीड़ा बनती जा रही है।
रेलवे प्रशासन के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है। अगर AC कोच में भी नियम और अनुशासन कायम नहीं रहेगा, तो यात्रियों का भरोसा धीरे-धीरे खत्म हो जाएगा। जरूरी है कि हर स्टेशन पर कड़ी चेकिंग, टीटीई की जिम्मेदारी तय करना और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि बिना टिकट या अनधिकृत लोग AC कोच में प्रवेश ही न कर सकें।
रेलवे देश की जीवनरेखा है। लोग केवल मंज़िल तक पहुंचने के लिए नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षित माहौल के साथ सफर करने के लिए भी टिकट खरीदते हैं।¶
अगर 3rd AC को फिर से वही भरोसेमंद और व्यवस्थित श्रेणी बनाना है, तो अब केवल शिकायतें सुनने से काम नहीं चलेगा — सख्त कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करनी ही होगी।


















