April 20, 2026 12:33 am

डॉ. राजेश मेहता नर सेवा नारायण सेवा संस्थान

आरती जाजू ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट नवंबर 1998 की बात है मैं ब्रेड लेने पीछे वाली गली की एक दुकान पर गई वहां मैंने देखा कि दुकान के बाहर बहुत भीड़ लगी है। लोग बहुत धक्का मुक्की कर रहे थे। दुकानदार के बहुत रिक्वेस्ट करने के बाद किसी तरह लोग पंक्ति बनाने को तैयार हुए। पूछने पर ज्ञात हुआ कि यह सारी भीड़ नमक खरीदने के लिए थी। उस दिन जाने कहां से इस अफवाह की शुरुआत हुई कि नमक की भयानक कमी होने वाली है। बस फिर क्या था दौड़ पड़े लोग दुकानों की ओर, अधिक से अधिक नमक खरीद कर घर में भर लेने के लिए। जिनके घर पूरे महीने भर में एक पैकेट नमक का नहीं लगता था वह भी अधिक से अधिक पैकेट खरीद लेना चाहते थे। व्यापारियों को और क्या चाहिए? जिसके पास नमक का स्टॉक था उसने छुपा लिया और लोगों के डर का फायदा उठाना आरंभ कर दिया। नतीजा नमक का ₹5 का पैकेट ₹100 में बिका। जबकि यह स्थिति दो-तीन दिन में ही ठीक हो गई थी और सामान्य कीमत में नमक मिलना भी आरंभ हो गया था। पता चला कहीं कोई शॉर्टेज थी ही नहीं।

इसी प्रकार कोरोना महामारी के समय जैसे ही लॉकडाउन की घोषणा हुई सरकार समझाती रह गई कि सभी आवश्यक वस्तुओं की दुकानें लॉकडाउन में खुली रहेंगी व सभी आवश्यक वस्तुएं दुकानों में उपलब्ध रहेंगी परंतु लोगों ने भीड़ लगाकर अधिक से अधिक सामान खरीदना आरंभ कर दिया। उस समय दुकानों की भीड़ देखकर लग ही नहीं रहा था कि कहीं कोई महामारी भी है या लोगों में उसका डर है। परिणाम? दुकानों में सचमुच आटा चीनी इत्यादि की कमी हो गई जबकि बाद में कोरोना काल में दुकानों में पूरा समय पर्याप्त सामान उपलब्ध था। इसको पैनिक बाइंग कहते हैं।

ऐसी घटनाएं अक्सर होती हैं किंतु इससे मनुष्य कुछ भी सीखता नहीं। अभी जैसे ही कुछ नेताओं ने अफवाह उड़ाई कि युद्ध के चलते तेल व गैस की समस्या हो जाएगी तो दौड़ पड़े लोग गैस सिलेंडर लेने। भारत की गैस एजेंसी में प्रतिदिन लगभग 55 लाख सिलेंडर बुक किए जाते थे यह बुकिंग पैनिक बाइंग की वजह से 75 लाख पहुंच गई अर्थात 20 लाख सिलेंडर रोजाना अधिक बुक किये जा रहे हैं जिसके कारण सचमुच रसोई गैस की उपलब्धता पर असर पड़ा है। जबकि बार-बार यह बताया जा रहा है कि वास्तव में समस्या है नहीं समस्या बनाई जा रही है।

ऐसी अफवाहें अक्सर अपने निजी लाभ के लिए कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों या नेताओं द्वारा उड़ाई जाती हैं। इस परिस्थिति में भी लोगों की इस घबराहट और भविष्य में गैस न मिलने के डर का लाभ वही लोग उठा रहे हैं। आम जनता को रसोई गैस नहीं मिल रही है किंतु होटल वाले व नेताओं से पहचान वाले लोगों को अधिक कीमत देकर गैस सिलेंडर मिल जाते हैं। समाजवादी नेता अब्दुल रहमान के घर में 55 भरे हुए व कुछ खाली सिलेंडर पकड़े गए हैं, यह इस बात का प्रमाण है। लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर इस कठिन समय में नेताजी ₹2000 प्रति सिलेंडर के भाव से बेचकर धन कमाने में लगे थे। जरूरतमंद लोगों की मजबूरी का इस प्रकार फायदा उठाने वाले लोगों को मनुष्य कहते हुए भी शर्म आती है। हिंसक पशु भी पेट भर जाने के बाद अपने शिकार को अन्य छोटे जानवरों के लिए छोड़ देते हैं जो शिकार करने में असमर्थ हों, परंतु, कालाबाजारी करने वाले, मानव की शक्ल वाले इन पशुओं का ना तो कभी पेट भरता है ना किसी के भूखे रह जाने से उसे फर्क पड़ता है।

 

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