
“ई-रिक्शा वाले ने कहा—’मैडम 20 रुपये में छोड़ दूँगा।’ लेकिन तभी जो हुआ, उसने मेरे रोंगटे खड़े कर दिए और मेरी अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया…”
संदीप सबरवल ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
शाम ढलने को थी और दोपहर की चिलचिलाती धूप शरीर को झुलसा रही थी। मैं चौराहे पर खड़ी सवारी का इंतजार कर रही थी। तभी एक पैडल रिक्शा वाला मेरे पास आया। चेहरे पर थकान और झुर्रियों में छिपी लाचारी साफ़ झलक रही थी। उसने धीमी आवाज़ में पूछा—
“बहन जी, कहाँ जाएँगी?”
मैंने अपनी मंजिल बताई और पूछा,
“कितने पैसे लोगे?”
उसने रुमाल से माथे का पसीना पोंछते हुए कहा—
“40 रुपये।”
मैंने हामी भर ही दी थी कि तभी एक ई-रिक्शा वाला अचानक वहाँ आ रुका। उसने झट से कहा— “मैडम! बैठिए, मैं आपको सिर्फ 20 रुपये में पहुँचा दूँगा!”
मैं ई-रिक्शे की तरफ कदम बढ़ाने ही वाली थी कि उस पैडल रिक्शा वाले की आवाज़ गूँज उठी। उसकी आँखों में एक अजीब सी बेबसी और मिन्नत थी। वह बोला—
“बहन जी, आप मुझे ही 20 रुपये दे दीजिए… मैं पहुँचा देता हूँ। सुबह से एक भी ग्राहक नहीं मिला है, घर में चूल्हा जलना मुश्किल हो जाएगा।”
उसकी यह बात सुनते ही मानो मेरा कलेजा हिल गया। एक इंसान अपनी हाड़-तोड़ मेहनत की कीमत सिर्फ इसलिए आधी कर रहा था ताकि उसके परिवार को दो वक्त की रोटी नसीब हो सके।
*पसीने से लथपथ शरीर, आँखों में आस लिए,
वो खड़ा रहा चौराहे पर, बेबसी की प्यास लिए।
चंद रुपयों की खातिर, ईमान दांव पर लगा दिया,
गरीबी ने उस मेहनतकश को कितना लाचार बना दिया!*
मैं बिना कुछ सोचे-समझे उसके पैडल रिक्शे पर बैठ गई। दोपहर की कड़कती धूप, तपती सड़क और 2 किलोमीटर का लंबा सफर…
जब उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर पैडल मारना शुरू किया, तो उसकी पीठ पर पसीने से भीगा कुर्ता और फूलती साँसें उसकी मेहनत की दास्तान बयान कर रही थीं।
हर एक पैडल के साथ मुझे अहसास हो रहा था कि हम अक्सर बड़े-बड़े मॉल और गाड़ियों में बेझिझक हजारों लुटा देते हैं, लेकिन इन मेहनतकशों से 10-20 रुपये के लिए मोलभाव करने लगते हैं।
जब मंजिल आई, तो उसने बहुत ही उम्मीद से मेरी तरफ देखा। मैंने जेब से 20 नहीं, बल्कि पूरे 40 रुपये निकालकर उसके हाथ में रख दिए। 40 रुपये देखते ही उसकी आँखों में जो चमक और राहत आई, वह दुनिया की किसी भी दौलत से बड़ी थी।
*धूप की तपिश में जब पहिया घूमा,
पसीने की बूंदों से ईमान चूमा।
पैसों के मोलभाव से परे हटकर,
आज किसी की दुआओं ने दिल को चूमा!*


















