
अलोक गुप्ता ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट ये पिता सुबह इंटरव्यू में रो रहा था पुलिस, मीडिया, पड़ोसी सभी को गुमराह कर रहा था कि मेरी बेटी चोरी हो गई। ये खुद हत्यारा निकला। ये दिल्ली के नामी स्कूल की वैन चलाता था इसके भरोसे दूसरों के मासूम बच्चे थे पर इसने खुद अपनी बच्ची मारकर सेफ्टी टैंक में डाल दी तो दूसरों के बच्चों पर क्या रहम करता होगा ये। बच्चों की वैन ड्राइवरों पर आंख बंद कर भरोसा न करें।
दिल्ली के मुकुंदपुर में कलयुगी पिता ने 10 महीने की बच्ची की हत्या की।
हत्या के बाद मासूम का शव घर के सेप्टिक टैंक में फेंका।
आरोपी ने बच्ची के चोरी होने की झूठी कहानी रच पुलिस को गुमराह किया।
पूछताछ में आरोपी पिता ने अपना जुर्म कबूल किया।
भलस्वा डेरी थाना पुलिस आरोपी को गिरफ्तार कर जांच में जुटी।
दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक कलयुगी पिता ने अपनी ही 10 महीने की मासूम बच्ची की हत्या कर दी। आरोप है कि दो बेटियां होने से परेशान पिता ने बच्ची को मारकर उसके शव को घर के सेप्टिक टैंक में फेंक दिया। वारदात के बाद आरोपी सुबह से पुलिस और आसपास के लोगों को बच्ची के चोरी होने की झूठी कहानी सुनाकर गुमराह करता रहा, लेकिन पुलिस पूछताछ में पूरा मामला खुल गया। फिलहाल भलस्वा डेरी थाना पुलिस आरोपी पिता से पूछताछ कर रही है। पिता का नाम दीपक है जो एक निजी स्कूल की वैन चलाता है। बच्ची का नाम निशिका है।
उत्तर दिल्ली के मुकुंदपुर इलाके में रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक पिता ने अपनी ही 10 महीने की मासूम बच्ची की कथित तौर पर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि आरोपी घर में दो बेटियां होने को लेकर अक्सर पत्नी से विवाद करता था।आरोप है कि आरोपी ने बच्ची की हत्या के बाद शव को घर के सेप्टिक टैंक में फेंक दिया और फिर पूरे मामले को छुपाने के लिए बच्ची के चोरी होने की कहानी गढ़ दी। सुबह से आरोपी पुलिस और आसपास के लोगों के साथ बच्ची की तलाश का नाटक करता रहा।जांच के दौरान पुलिस को आरोपी की गतिविधियों पर शक हुआ। सख्ती से पूछताछ करने पर आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इसके बाद पुलिस ने घर के सेप्टिक टैंक से बच्ची का शव बरामद किया।घटना के बाद इलाके में लोगों के बीच गुस्सा और दुख का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
फिलहाल भलस्वा डेरी थाना पुलिस आरोपी पिता को गिरफ्तार कर मामले की जांच में जुटी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस वारदात में आरोपी अकेला शामिल था या परिवार का कोई और सदस्य भी इस साजिश का हिस्सा था।
मृतक बच्ची की दादी से पत्रकारों की बातचीत के अंश- **पत्रकार:** अच्छी… आप उनकी क्या लगती हैं?
**महिला:** मैं उसकी लड़के की माँ लगती हूँ, लड़की की दादी लगती हूँ।
**पत्रकार:** माता जी, जिस तरीके से सुबह बच्ची को ढूंढा जा रहा था और शाम को इस तरीके से सच सामने आया है, क्या कहना है?
**महिला:** मेरे को नहीं बेटा कुछ पता, मैं तो इधर में सोई। रात को मैं 11:00 बजे आई थी, उधर से मेरी… बस वो बड़ी वाली बेटी है ना, उसको मारा उसने कल सवेरे। तो मैं बोली तेरे हाथ कटे क्या, जो लड़की को ऐसे मारा, तुझे लड़की की बददुआ तो पड़ेगी ही। वो बोला तुम्हारा कोई मतलब नहीं है इसमें बोलने का, मेरा बच्चा है, मैं कुछ भी करूँ। मैं रोई-पीट के, दो-चार बातें वो भी रोई, मैं रोई-पीट के अपने घर में आ गई। मैं काम पे चली गई। मैं पूरे दिन रोई, मैं संगीता वालों से पूछो, मैं पूरे दिन वहाँ रोई। मैंने कहा “क्यों मारता है, मेरा कलेजा निकल जाता है।” शाम हुआ कि मेरी बहू…
**पत्रकार:** पारिवारिक… किसी कलह के चलते उन्होंने ये किया?
**महिला:** भाई, कलह इसमें… ना कोई चोर था, ना कोई … ना ये कभी किसी को देता, ना किसी से लेता।
**पत्रकार:** तो अब आपको क्या पता… मतलब क्या लगता है, क्या हुआ होगा?
**महिला:** वो अब, वो तो यही कहता है “मेरे पे दो बेटी है, मेरे पे बहुत बोझ हो गया।” मैंने कहा मैंने तीन पाल ली, आज के जमाने में तो बेटी कमा के खा लेती है, और कुछ नहीं कहता। कहता है “मैं किसी का भी कुछ ना दूँ, मेरे पे दो बेटी है। मेरे पे बहुत बोझ है। मैं इस उम्र पे… मेरे पे बहुत वजन है, मैं नहीं क्या कर पाऊँगा। माँ-बाप को कतई नहीं देखूँगा।”



















