April 20, 2026 3:54 am

दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो इन दिनों सिर्फ सफर के लिए नहीं, बल्कि विवादों की वजह से भी चर्चा में है।

अशोक ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट दिल्ली की लाइफलाइन मानी जाने वाली दिल्ली मेट्रो इन दिनों सिर्फ सफर के लिए नहीं, बल्कि विवादों की वजह से भी चर्चा में है। हाल ही में एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें महिला कोच के अंदर 4 नाबालिग लड़कियों की हरकतों ने सभी को चौंका दिया है।

यह घटना 23 मार्च की शाम करीब 8 बजे की बताई जा रही है। एक महिला यात्री श्रुति शर्मा ने बताया कि वह हौज खास मेट्रो स्टेशन से मेट्रो में चढ़ीं। कोच में पहले से मौजूद 4 नाबालिग लड़कियां फर्श पर बैठकर शोर-शराबा और गाली-गलौज कर रही थीं।

शुरुआत में लोगों ने इसे नजरअंदाज किया, लेकिन धीरे-धीरे उनका व्यवहार और भी खराब होता गया। लड़कियों ने कोच में बैठी अन्य महिलाओं पर कमेंट करना शुरू कर दिया और उन्हें अपमानजनक नामों से बुलाने लगीं।

यात्रियों को बनाया निशाना

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन लड़कियों ने एक महिला के कपड़ों और लुक्स पर टिप्पणी की और उसे चिढ़ाने लगीं। जब बाकी यात्रियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो उन्होंने उल्टा उन्हें ही गालियां देना शुरू कर दिया। इससे कोच का माहौल काफी असहज हो गया और कई लोग अपनी सीट छोड़कर दूर चले गए।

“मैं सदमे में हूं” – यात्री

श्रुति शर्मा ने बताया कि यह घटना उन्हें अंदर तक हिला गई। उन्होंने कहा कि इतनी कम उम्र में इस तरह की भाषा और व्यवहार बेहद चिंताजनक है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर ऐसी लड़कियों को मेट्रो में एंट्री कैसे मिल जाती है।

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई यूजर्स ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि “बच्चे हैं” कहकर ऐसी हरकतों को नजरअंदाज करना सही नहीं है।

क्या नाबालिग होने पर छोड़ देना चाहिए?

भारत में नाबालिगों के लिए अलग कानून है, जिसे Juvenile Justice Act कहा जाता है। इस कानून के तहत 18 साल से कम उम्र के बच्चे भी गलत व्यवहार के लिए जिम्मेदार माने जाते हैं, लेकिन उनके लिए सजा का तरीका अलग होता है।

ऐसे मामलों में बच्चों की काउंसलिंग की जाती है और साथ में माता-पिता को शामिल किया जाता है। गंभीर मामलों में बाल सुधार गृह भी भेजा जा सकता है।

समाज के लिए चिंता का विषय

इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतनी कम उम्र में बच्चे इस तरह का व्यवहार क्यों कर रहे हैं। कहीं न कहीं इसमें परवरिश, सोशल मीडिया का प्रभाव और माहौल भी जिम्मेदार हो सकता है।

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