
अतुल ब्यूरो चीफ मेट्रो टुडे लाइव प्रयागराज में जमुना नदी पर बना यह लगभग 160 साल पुराना पुल है, जिसे “पुराना यमुना पुल” कहा जाता हैं क्या है इस पियर का रहस्य आखिर किसी अंग्रेज इंजीनियर ने इस पिलर को क्यों दिया जूते जैसा शेप।
इसका पिलर नंबर 13 बनाना था पिलर नंबर 13 जमुना नदी की सबसे गहरी जगह में बनना था पानी का बहाव इतना तेज था कि जब पिलर खड़ा किया जाता वह जाता था।
जमुना नदी के तेज बहाव के चलते पिलर नंबर 13 को बनाने में सबसे अधिक परेशानी हो रही थी, इस रहस्यमी पिलर नंबर 13 को बनाने में करीब 2 साल का समय भी लगा।
पानी के तेज बहाव के चलते ढलाई का प्लेटफॉर्म जो बनाकर तैयार किया जाता अगली सुबह वह जमुना जी के तेज बहाव में बह चुका होता कोई भी इंजीनियर इस पिलर नंबर 13 को खंबे की नींव पर टीका नहीं पा रहा था मजदूर दिन रात मेहनत करते जमुना जी की धारा उनकी मेहनत पर पानी फेर देती।
इस पिलर को बनाने वाले इंजीनियर मिस्टर सिवले कई दिनों बाद रात में एक ख़्वाब देखते है कि उनकी पत्नी उसी जगह पानी में खड़ी है उसने अपने पैरों में सैंडल पहना हुआ है जो ऊंचे हिल की हैं ओर पानी उसके आसपास से काटते हुए निकल रहा हैं और सैंडल को कुछ नहीं हो रहा है, अगली सुबह इंजीनियर ने ऐसा ही नक्शा बनाया जो पानी को काटता है तब जाकर ये पाया बन पाया।


















