
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की रिपोर्ट
शिक्षक सिर्फ़ वो नहीं
जो तख्ती पर सबक लिखें
कुछ उस्ताद बिना चाक, बिना किताब के आते हैं
जैसे वो बीज … जिसके सब्र से सीखा
कि ख़ुदा के घर देर हैं , अंधेर नहीं
किताब के अंदाज़ से सीखा कि
पन्ना पलट लिया जाए गर कहानी पसन्द नहीं
माँ से सीखी भिंडी नहीं हर हाल में शुक्राना
बाबा से सीखी जिम्मेदारियां नहीं बल्कि हर हाल में निभाना
दोस्त से सीखा हर रोज़ मिलना नहीं वक़्त पर मिल जाना
दुश्मनों ने सिखाया दिल का दिल हि रहना ना कि दिवार बनना
उस धोखे से सीखा कि नदी किनारे से बिछड़कर ही रफ़्तार पकड़ती हैं”उस सहारे से सीखा कि पतंग डोर से बंधकर हि आसमान छूती हैं
धूप से सीखा जलना नहीं सहन करके पकना
बारिश से सीखा टूटना नहीं बरस कर हल्का होना
।। तो शिक्षक सिर्फ़ वो नहीं जो जो केवल तख्ती पर सबक लिखें ।। आपको शिक्षक दिवस की अनन्त बधाई 



















