
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की रिपोर्ट
जब आप समाचार पढ़ेंगे तो पाएंगे कि गृहमंत्री ने ऐसी कोई नई बात नहीं कही है जिस पर हिंदुनिष्ठ सोशल मीडिया ने पिछले 12 वर्ष से लगातार चिंता व्यक्त न की हो !…
घुसपैठ कोई मियादी बुखार नहीं रह गया है,जिसका देर सवेर इलाज हो जाये, अब घुसपैठ लाइलाज कैंसर में तब्दील हो चुका है… मुझे पूर्ण विश्वास है कि अनजाने में गृहविभाग के उन अफसरों के घरों में बांग्लादेशी नौकरानियां …बदले हुए नामों से काम करती होंगीं,जिनका उत्तदायित्व घुसपैठियों को निकालना है !
घुसपैठियों और जासूसों के बारे में देश के रक्षाधिकारियों की चिंता का स्तर यह है कि एयरफोर्स स्टेशन के ठीक गेट के सामने प्रतिबंधित क्षेत्र पर अवैध रूप से गन्ने का रस का ठेला लगा है, मगर किसी को चिंता नहीं कि कोई शख्स इस गन्ने के ठेले की आड़ में लगातार एयरफोर्स अधिकारियों की आवाजाही…और एक्टिविटी पर निगाह रख सकता है…
एक आर्मी रेजिमेंट के ठीक सामने आर्मी लैंड पर एक के बाद एक कब्रें राष्ट्रीय राजमार्ग पर बनती जाती हैं, मगर उत्तरदायी लोगों की आंखें बंद रहती हैं… एक माउंटेन डिवीजन के HQ सामने एक मजार पर हर बृहस्पतिवार को दूर दूर से आये लोगों का मेला से लगता है… कोई जागरूकता नहीं !
बांग्लादेश और नेपाल से हो रही घुसपैठ बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है,सीमारेखा पर बने इबादतगाह और मज़हबी तालीम के नाम पर बने अवैध इदारे…अपना काम बखूबी निभा चुके हैं और निभा रहे हैं, बहुत से इदारे तो स्वयं घुसपैठियों द्वारा ही बनाये हो सकते हैं, भारतीय सीमा में नए नए घुसे घुसपैठियों को यह इदारे अपने यहां रहने -रुकने की सुविधा देते पाए गए हैं !… इन इदारों में आम नागरिक तो छोड़िए,पुलिस और सुरक्षाबल तक घुसने की हिम्मत बड़ी मुश्किल से जुटाते होंगे…
क्या सरकार को मालूम नहीं होना चाहिए था कि शुभेन्दु सरकार के आने के बाद बंगलादेशी घुसपैठिये…बंगाल छोड़कर सेक्युलर / कांग्रेसी सरकारों वाले राज्यों की ओर रुख करेंगे ?…हज़ारों बंगलादेशी बंगाल से भागकर केरल,हैदराबाद



















