
संदीप सबरवा ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
तस्वीर 1 : संयोग कभी-कभी इतना निर्मम भी हो सकता है कि जीवन भर उसका उत्तर नहीं मिलता। चार भाई जिनकी उम्र 25 से 33 वर्ष के बीच थी जो सामान्यतः कभी एक साथ यात्रा नहीं करते थे उस दिन एक ही वाहन में सवार होकर काम के सिलसिले में घर से निकले। संयोग से चारों भाइयों को एक ही गांव में काम मिल गया और चारों अपनी कार से जा रहे थे किसी ने नहीं सोचा था कि यह साथ उनका अंतिम साथ साबित होगा।
रास्ते में हुई एक दुर्घटना ने समय को जैसे एक ही क्षण में थाम लिया। चारों भाइयों काजीवन एक साथ समाप्त हो गया। जिस आँगन में चार बेटों की आवाजें गूंजती थीं वहाँ अब एक ऐसा सन्नाटा उतर आया है जिसे शब्दों में व्यक्त करना कठिन है।
चारों भाइयों में तीन शादीशुदा थे जिसमें से एक के तीन बच्चे बाकी दो के दो दो बच्चे है छोटा भाई गूंगा था उसकी शादी नहीं हुई थी अब घर में सिर्फ माता-पिता तीन भाइयों की पत्नियां और 7 बच्चे रह गए हैं
माता-पिता के लिए यह केवल चार संतानों का वियोग नहीं बल्कि अपने भविष्य अपने संबल और अपनी आशाओं को एक साथ खो देने जैसा है। एक ही चिता पर नहीं बल्कि एक ही दुख में चार-चार जीवनों की स्मृतियाँ समा गई हैं।
कुछ घटनाएँ समाचार से आगे बढ़कर मानवीय संवेदना का विषय बन जाती हैं। यह भी ऐसी ही एक घटना है, जो हमें जीवन की अनिश्चितता और नियति की कठोरता के सामने निःशब्द खड़ा कर देती है।
तस्वीर 2 : तस्वीर में दिख रहे पतराम गोदारा जी की हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई
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