
रश्मी शर्मा ब्यूरो चीफ के कलम से
हम विवाह क्यूँ करते हैं ??? लोग कहते है सृष्टि चलाने के लिए झूठ आजकल विवाह सिर्फ सेक्स के लिए किए जाते हैं और उसी सेक्स से बच्चे पैदा हो जाते हैं जबकि बच्चों के लिए कोई सेक्स नहीं करता..एक अनजान लड़की और एक अनजान पुरुष का आपस में क्या मेल होता है जिसे हम विवाह कहते हैं. विवाह का अर्थ होता है दो आत्माओं का मिलन मुझे हँसी आती है इस शब्द पर कितनी आत्माये और किस की मिलती है यहां..अधिकतर स्त्री पुरुषों को एक दूसरे की बुराई करते देखा है. पुरुष अपनी माँ बहन से अपनी पत्नि की बुराई करते हैं स्त्रियाँ अपने माता-पिता और भाई बहन से बुराई करती पाई जा सकती है..सोचिए अगर आत्माओं का मिलन होता तो बुराई की गुंजाइश नहीं होती..फिर धीरे धीरे सेक्स खत्म प्रेम खत्म..हमारे समाज में सेक्स को प्रेम से जोड़ दिया फिर विवाह से जोड़ दिया पहले किसी नवयुवक
नवयुवती को देखिए सेक्स के लिए ठीक है कि नहीं बाह्य रूप यौवन पर आधारित विवाह जीवन भर नहीं चल सकता है !!
हमे आंतरिक सौंदर्यबोध तो उसके साथ रहने के बाद होता है
और आंतरिक सौंदर्य बहुत कम लोगों में पाया जाता है ,तभी विवाह तलाक या तनावपूर्ण स्थिति में आते हैं..जिस व्यक्ति के साथ आप जीवन बिताने जा रहे हैं वह आपके विचार वाला है या नहीं एक पूरब होता है एक पश्चिम और यही वजह है कि कलियुग में कोई सुखी नहीं है क्युकी आपने अपने आदर्शों के विरुद्ध आचरण करना शुरू कर दिया है.. अपने धर्मानुसार हमारा आचरण है ही नहीं..और जब अनुशासन खत्म हो जाता है तब व्यवस्था कितनी भी सुदृढ़ हो चरमरा ही जाती हैं पतन निश्चित है..स्त्रियों को जानबूझकर एक लम्बे समय से दासियों की तरह रखा जा रहा है भेड़ बकरी बना दिया है उनकी समस्त प्राकृतिक सुंदरता को, शिक्षा को नष्ट करने का परिणाम है आज विवाह किसी जेल से कम नहीं
जब तक स्त्रियों को भेड़ बकरी समझा जाएगा समाज में सुधार नहीं होगा, स्त्रियों को सनातन धर्म के अनुसार सभी हक दीजिए,, मत कहिए सीता सावित्री होती है..बल्कि उन्हें दर्जा दीजिए सीता का सावित्री का जब वह किसी पुरुष की तरफ पीड़ा में देखे तो हर पुरुष उसकी सहायता के लिए हाथ बढ़ाए उसके चीर हरण की नहीं सोचे पहले सनातन धर्म में पुरुषों का स्थान बहुत ऊंचा था रावण चाहता तो 2 मिनट में सीता जी को पा सकता था लेकिन उसने सीता जी को तोड़ने का प्रयास किया और नहीं तोड़ सका..पहले पुरुष स्त्रियों की इच्छा के विरुद्ध उन्हें हाथ नहीं लगाते थे आजकल बच्चियों तक को नोच लिया जाता है.. जिस दिन विवाह के मंत्रोच्चार को समझ जायेगे उस दिन कोई तलाक नहीं होगा कोई पुलिस केस कोई दहेज नहीं होगा..कोई पर स्त्रीगमन कोई पर पुरुष गमन नहीं होगा..खोखली प्रथाये और मनमानी समाज को सिर्फ नर्क का द्वार दिखा सकती हैं वहीं लोग देख रहे हैं ..



















