
अनीता ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
उसके बाद उसकी सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की पूरी जिम्मेदारी जेल प्रशासन और सिस्टम की होती है।
लेकिन सोचिए…
अगर वही महिला जेल के भीतर ही असुरक्षित हो जाए, उसकी आवाज दबा दी जाए और सलाखों के पीछे रहते हुए वह गर्भवती हो जाए, तो यह सिर्फ एक घटना नहीं बल्कि पूरी जेल व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
जेल कोई खुली दुनिया नहीं होती, जहां कोई भी आसानी से पहुंच सके।
वहां हर गतिविधि निगरानी में होती है, हर बैरक पर पहरा होता है और हर कैदी प्रशासन की जिम्मेदारी में होता है।
ऐसे में किसी महिला कैदी का गर्भवती होना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही हुई है।
अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जिम्मेदार कौन है…?
कोई कैदी…
कोई जेल कर्मचारी…
या फिर वह सिस्टम, जिसने सुरक्षा के बड़े-बड़े दावे किए लेकिन एक महिला की इज्जत तक सुरक्षित नहीं रख पाया।
सबसे दर्दनाक पहलू उस मासूम बच्चे का है,
जो किसी अपराध की वजह से नहीं बल्कि सिस्टम की नाकामी और लापरवाही के कारण जेल की दीवारों के बीच जन्म लेने को मजबूर हो जाता है।
महिला अधिकारों और मानवाधिकारों से जुड़े लोग इस तरह की घटनाओं को बेहद गंभीर मान रहे हैं। उनका कहना है कि जेल में बंद महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ कानून नहीं, बल्कि इंसानियत की भी जिम्मेदारी है।
अब जरूरत सिर्फ जांच और बहस की नहीं, बल्कि ऐसे बदलाव की है जिससे जेल की सलाखों के पीछे बंद कोई भी महिला खुद को असुरक्षित महसूस न करे।#



















