
मनोज ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट आयुक्त बाड़मेर में कई वर्ष तक रहे है। इसलिए बाड़मेर की गलियों और आम रस्तों से अच्छी तरह वाकिफ है।
अभी मैं आपको जिस कॉमर्शियल बहुमंजिला भवन का फोटो भेज रहा हु। आप इसको निष्पक्ष और पारदर्शिता से आमजन को बताए कि क्या यह कॉमर्शियल बिल्डिंग नियमानुसार बनी है।
*अगर आपने इसके पास निर्मित कॉमर्शियल भवन की सत्यता से जांच कर ली होती तो, आज इस अवैध कॉमर्शियल बिल्डिंग का निर्माण नहीं होता।*
पूरे भारत वर्ष में माननीय सर्वोच्च न्यायालय से भी ऊपर कोई न्यायालय है क्या?
यदि नहीं तो उक्त दोनों मल्टीस्टोरी कॉमर्शियल बिल्डिंग वालों को मात्र इतना तो पूछ लो कि क्या :
*इन्होंने आपके कार्यालय, नगर परिषद बाड़मेर से कंप्लीशन एंड ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट ले रखा है। यदि नहीं तो इनको उक्त अवैध निर्मित कॉमर्शियल बिल्डिंग में व्यवसाय करने की अनुमति किसने दी।और यदि बिना इन सर्टिफिकेट को प्राप्त किए अवैध कॉमर्शियल एक्टिविटी की जा रही है,तो क्या यह माननीय सर्वोच्च न्यायालय भारत की अवमानना नहीं है।*
सूत्र, बताते है कि इसमें बहुत बड़ा भ्रष्टाचार किया गया है। हमे यहां तक जानकारी मिली है कि इन आयुक्त साहब से यदि आपको किसी भी तरह का कोई लीगल/ इलीगल कार्य करवाना है तो एक प्राइवेट शख्स हैं,उसे रुपए जमा करवा दो, और कर लो अपना अवैध निर्माण।
*अगर आपके ध्यान में कोई सरकारी/ परिषद की भूमि है,और आप उसको अपनी बनाना चाहते है, वो भी करवा देगा ये व्यक्ति, बस इसकी रेट करोड़ों में होगी।*
*क्यों कि बाड़मेर शहर में इन सफेद नकाब पोश/ धनाढ्य लोगों का ग्रुप बना है। जिसमें ACB विभाग के कुछ कार्मिक शामिल है,जो उन्हें इस बात की तो गारंटी देता ही है कि हमारे विभाग से हम कोई कार्यवाही नहीं होने देंगे। साथ ही अन्य विभागों में भी हमारी धौंस चल जाएगी।*



















