
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की रिपोर्ट आज इंस्टाग्राम पर बढ़ती अश्लीलता और भ्रामक कंटेंट को देखकर कई बार ऐसा महसूस होता है कि हम किसी सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर नहीं, बल्कि किसी ऐसी वेबसाइट पर आ गए हैं जहाँ सिर्फ़ ध्यान आकर्षित करने की होड़ लगी है।
क्रिएटिविटी और अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर कई लोग अश्लीलता को बढ़ावा दे रहे हैं। चिंता की बात यह है कि अब उम्र की सीमाएँ भी मानो खत्म होती जा रही हैं। जिस उम्र में व्यक्ति आध्यात्मिकता, संस्कारों और जीवन मूल्यों की बात करे, उस उम्र में भी कुछ लोग सोशल मीडिया पर केवल शारीरिक प्रदर्शन के ज़रिए लोकप्रियता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
जब समाज के हर आयु वर्ग में इस तरह का कंटेंट सामान्य होता जा रहा है, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इसका युवाओं और आने वाली पीढ़ियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का माध्यम है, लेकिन इसकी आज़ादी के साथ जिम्मेदारी भी जुड़ी है। हमें यह तय करना होगा कि हम समाज को सकारात्मक दिशा देने वाला कंटेंट बढ़ावा देना चाहते हैं या केवल वायरल होने की दौड़ में मूल्यों से समझौता करना चाहते हैं।
Instagram vulgar content, Instagram controversy, social media addiction, social media impact on youth, Instagram reels controversy, digital culture India, online morality debate, social media awareness, youth mental health, harmful online content, content moderation, family values, internet safety, social media trends India, Instagram algorithm, viral content culture, responsible social media use, negative effects of social media, screen addiction, digital parenting.



















