
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की रिपोर्ट
#हिसार आज पंजाबी समाज की बैठक में लिये गए बड़े निर्णय, ‘पाकिस्तानी’ और ‘रिफ्यूजी’ शब्दों के प्रयोग पर जताया कड़ा विरोध। सभी ने 36 बिरादरियों से भाईचारा, सम्मान और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
आज पंजाबी समाज के प्रमुख व्यक्तियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें समाज के सम्मान, ऐतिहासिक संवेदनाओं एवं सामाजिक एकता से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में सर्वसम्मति से कहा गया कि पंजाबी समाज के लिए “पाकिस्तानी” एवं “रिफ्यूजी” जैसे शब्दों का प्रयोग पूरी तरह अस्वीकार्य है और भविष्य में इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वक्ताओं ने कहा कि 1947 के भारत विभाजन के दौरान पश्चिमी पंजाब से आए लाखों परिवारों ने अपने घर, जमीन-जायदाद और कारोबार खोए तथा असंख्य लोगों ने बलिदान दिए। ऐसे में इस प्रकार के शब्द न केवल समाज के सम्मान को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि पूर्वजों के त्याग और बलिदान का भी अपमान हैं।
बैठक में निर्णय लिया गया कि भविष्य में यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार के अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करता है तो उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही हरियाणा सरकार, मंत्रियों, विधायकों एवं सांसदों को ज्ञापन सौंपकर विधानसभा और संसद में इस विषय पर कठोर कानून बनाने की मांग की जाएगी।
समाज के प्रतिनिधियों ने सभी 36 बिरादरियों से भाईचारा, सम्मान और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। बैठक के अंत में रोहतक अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों को दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई तथा प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की गई।
राजेन्द्र चूटानी ने बताया कि बैठक में मेयर प्रवीण पोपली, पूर्व मेयर गौतम सरदाना, शम्मी नागपाल, सरदार गुलजार सिंह काहलों, सुभाष ढींगरा सहित समाज के अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।



















