
*आज जरूरत है पनीर के बहिष्कार करने की*
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की कलम से जयपुर पुलिस और फूड सेफ्टी विभाग ने गत दिनों कई बार दूषित और घटिया पनीर जयपुर मे अलग अलग जगहों पर पकड़ा है। यह पनीर 24 घंटे चलने वाली फैक्ट्रियों में कैमिकल द्वारा बनाया जाता है और बिना किसी डर के धड़ल्ले से बाजारों में हलवाइयों , होटलों, रेस्टोरेंटों और कैटरिंग वालो को नियमित सप्लाई किया जाता है। यह घटिया पनीर हमारी किडनी और लीवर पर तो सीधा अटैक करता ही है साथ ही शरीर मे कैंसर जैसी लाइलाज और महंगी बीमारी देने में भी बड़ी भूमिका निभाता है जिसके बाद इंसान फिर दवाओं और जांचों में ही उलझा रहता है ,समाज में जो इस तरह के पेशेंट बढ़ रहे हैं उनमें ज्यादातर वह कैमिकल वाले पनीर की देन है । ऐसा नहीं है कि सरकार और प्रशासन को कुछ पता नहीं है उन्हें सब पता है और कार्यवाही भी कभी कभार चलती है और फिर कार्यवाही की जानकारी मीडिया को दे दी जाती है लेकिन यह कार्यवाहीया ऊंट के मुंह में जीरे के समान ही है क्यों सामने नकली और दूषित पनीर का साम्राज्य बहुत विशाल खड़ा हुआ है जिसे भेदने के लिए नियमित और कड़क छापेमारीयों के साथ बेहद कड़े कानून की भी जरूरत है। खैर अब हमे यानि समाज को खुद ही अपनी सुरक्षा अपने हाथ मान कर नकली पनीर के कहर से बचना होगा और इसका सबसे आसान जो रास्ता है वह है पनीर के पूर्णतया बहिष्कार करने का। हम तभी इस नकली और जानलेवा पनीर के कहर से बच सकते है जब इसे हम कुछ समय के लिए त्याग देंगे।क्यों कि हमें असली और नकली पनीर का नहीं पता और ना ही अंदाजा लगा सकते है की जिसे वह स्वाद और चटखारे लेकर खा रहे है वह कैसा है ? चूंकि हमारे समाज में पनीर खाने का चलन ज्यादा है तो मिलावटियों ने इसकी तगड़ी बिक्री देखते हुए नकली कैमिकल वाला पनीर इजाद कर मुनाफे के लिए इसे बेचना शुरू कर दिया है। इसलिए अब पनीर खाने का लालच तो हमे स्वस्थ रहने के लिए छोड़ना ही होगा ।



















