
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ कीरिपोर्ट हाईकोर्ट में आज एक अहम मोड़ देखने को मिला, जब Arvind Kejriwal की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने खुद को मामले से अलग करने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बिना ठोस सबूत के लगाए गए आरोप केवल कयास हैं और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकते।
जस्टिस शर्मा ने कहा कि अदालत तथ्यों और कानून के आधार पर फैसले लेती है, न कि किसी राजनीतिक दबाव या सार्वजनिक बयान के आधार पर। उन्होंने यह भी साफ किया कि किसी कार्यक्रम में शामिल होना या परिवार के पेशेवर संबंध, पक्षपात का प्रमाण नहीं हो सकते, जब तक उनका सीधा संबंध केस से साबित न हो।
उन्होंने इस पूरे मामले को “कैच-22” स्थिति बताते हुए कहा कि अगर वह खुद को अलग करतीं तो भी सवाल उठते और नहीं करतीं तो भी आरोप लगते। ऐसे में उन्होंने न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता को बनाए रखते हुए सुनवाई जारी रखने का फैसला लिया।



















