April 20, 2026 2:16 am

फिरोजाबाद में एक महिला PCS अधिकारी और जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी (DM) के बीच की लड़ाई अब खुलेआम सामने आ गई है।

संदीप सबरवल ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट फिरोजाबाद में एक महिला PCS अधिकारी और जिले के सर्वोच्च प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी (DM) के बीच की लड़ाई अब खुलेआम सामने आ गई है। टूंडला की तहसीलदार राखी शर्मा ने एक भावुक वीडियो जारी कर जिलाधिकारी रमेश रंजन पर भ्रष्टाचार और मानसिक उत्पीड़न के संगीन आरोप लगाए हैं।

“अफसर बनकर भी सुरक्षित नहीं हूं” — तहसीलदार का दर्द

राखी शर्मा का कहना है कि प्रशासन में ईमानदारी से काम करने की उन्हें सजा दी जा रही है। उनके मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:

• iPhone और iWatch की डिमांड: तहसीलदार का आरोप है कि DM ने ओएसडी के माध्यम से उनसे साढ़े सात लाख रुपये का आईफोन और एप्पल वॉच की डिमांड की। 4 नवंबर 2024 की रात आगरा का एक शोरूम विशेष रूप से खुलवाकर यह फोन खरीदा गया, जिसका बिल और सबूत उनके पास हैं।

• वेतन रोका गया: आरोप है कि भ्रष्टाचार में साथ न देने पर उनकी 8 महीने की सैलरी रोकी गई, जिसे उन्होंने कोर्ट के जरिए रिलीज कराया।

• चरित्र हनन की कोशिश: महिला अफसर ने रोते हुए बताया कि अब उनके चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हैं और पुरानी पोस्टिंग (मथुरा) तक में उनके खिलाफ टीमें एक्टिव कर दी गई हैं।

“इंस्पेक्टर साहब, सब खत्म हो गया”

सोशल मीडिया पर वायरल एक ऑडियो/वीडियो में तहसीलदार एक पुलिस इंस्पेक्टर से बात करते हुए फूट-फूट कर रो रही हैं। उनका कहना है— “मैं भीख मांगती फिर रही हूं कि मेरी तहरीर ले लो। मुझे मेंटली हैरेस किया जा रहा है और मुझे बाहर निकलने में डर लग रहा है।” उनके पिता की तबीयत भी इस तनाव के कारण बिगड़ गई है।

DM की चुप्पी और जांच का दबाव

जहाँ एक तरफ तहसीलदार राखी शर्मा प्रेस कॉन्फ्रेंस और वीडियो के जरिए अपनी बात रख रही हैं, वहीं जिलाधिकारी रमेश रंजन ने इस पूरे मामले पर फिलहाल चुप्पी साध रखी है। तहसीलदार का कहना है कि उन पर दबाव बनाने के लिए लेखपालों से उनके खिलाफ लेटरपैड पर लिखवाया जा रहा है।

💬 जनता की अदालत: प्रशासन और महिला सुरक्षा पर सवाल (कमेंट में बताएं)

1. भ्रष्टाचार की सीमा: अगर एक मजिस्ट्रेट स्तर की अधिकारी को आईफोन जैसे उपहारों के लिए प्रताड़ित किया जा सकता है, तो आम जनता की क्या बिसात? क्या इस मामले की उच्च स्तरीय जांच (CBI या SIT) नहीं होनी चाहिए?

2. कैरेक्टर असेसिनेशन: किसी भी महिला अधिकारी को दबाने के लिए ‘चरित्र हनन’ का रास्ता अपनाना कितना सही है? क्या यह प्रशासनिक तंत्र की कमजोरी को नहीं दर्शाता?

3. अफसरों का डर: जब एक PCS अधिकारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रही है और सीएम से मदद मांग रही है, तो प्रदेश में महिला सशक्तिकरण के दावों पर यह कैसी छाया है?

तहसीलदार राखी शर्मा के साहस को सपोर्ट करें और इस पोस्ट को शेयर करें ताकि यह आवाज मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक मजबूती से पहुँचे और निष्पक्ष जांच हो सके।

 

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