April 20, 2026 6:13 am

मैं यही कहना चाहूँगी कि अपने बच्चों के साथ संवाद ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।

उदयपुर शहर के जिस क्षेत्र में मैं रहती हूँ, उस क्षेत्र में बहुत सारे कोचिंग सेंटर और उनके पीजी तथा हॉस्टल संचालित है। जहाँ शहर के और शहर से बाहर के भी बहुत बच्चे रह कर अपनी पढ़ाई करते हैं। इनमें बॉयज पीजी, हॉस्टल और गर्ल्स पीजी, हॉस्टल भी है। इन बच्चों को जब हॉस्टल और पीजी का खाना अच्छा नहीं लगता तो बाहर से आर्डर करते हैं। जोमैटो, स्विग्गी और ब्लिंकिट जैसे फूड डिलीवरी एप्स के जरिए खाना उन तक पहुँचता है। मैं जब शाम को खाना खाने के बाद घूमने पर जाती हो तो बहुत सारी लड़कियों को इन डिलीवरी बॉयज के साथ बात करते हुए देखती हूँ। बहुत सी बार मैं यह देखती हूंँ कि मैं दो-तीन राउंड लगाती हूँ तब तक कुछ लड़कियाँ इन डिलीवरी बॉयज के पास खड़ी है और खूब बातें कर करके हंस रही है ।मेरे मन में एक डर सा बैठता है मैं सोचती हूं की माँ बाप ने इन बच्चियों को यहाँ पढ़ने के लिए भेजा है और यह किससे बात कर रही है ? और आखिर इतनी देर तक क्या बात हो रही है ? सामान या फूड पैकेट जो भी है दिया और पैसा चुकता किया बात खत्म, पर नहीं।

खैर छोड़िए यह तो मैं आए दिन देखती हूँ पर एक दिन जो मैंने देखा वह बहुत विचारणीय था ।

डिनर के बाद में वॉक कर रही थी मेरे आगे- आगे एक लड़का 20-25 साल का रहा होगा, वह भी सड़क पर वॉक कर रहा था । वॉक के साथ-साथ वह किसी से फोन पर बात कर रहा था और उसके बात करने के तरीके से मुझे ऐसा लगा कि वह किसी लड़की से बात कर रहा था। जब मैंने एक राउंड लगाया और 10 मिनट बाद आई तब भी वह लड़का वहीं पर टहलते हुए बात कर रहा था। इस बार उसके बात करने का तरीका अलग था। वह बहुत अग्रेशन में था और सामने वाली लड़की को बहुत भयंकर डाँट रहा था। उसको कह रहा था कि “मुझसे अब तुम्हारे बगैर रहा नहीं जाता। तुम अभी मिलने आओ। अगर तुम नहीं आई तो मैं तुम्हारे हॉस्टल आ जाऊंगा।”

मैंने जब उसके इस तरह के शब्द सुने तो मैं धीरे-धीरे उसके पीछे-पीछे घूमने लगी कि आखिर वह किसको परेशान कर रहा है ? फोन से लड़की की आवाज आ रही थी। वह रिक्वेस्ट कर रही थी कि मैं अभी नहीं आ सकती, पर वह लड़का मानने को तैयारी नहीं। वह बार-बार यही कह रहा कि “अगर तुम नहीं आई तो मैं तुम्हारे हॉस्टल आ जाऊंगा और फिर क्या होगा यह तुम जानो।” फोन से जो आवाज आ रही थी वह बहुत करूण आवाज थी। वह बार-बार रिक्वेस्ट कर रही थी कि समझने का प्रयास करो ।मैं नहीं आ सकती लेकिन फिर भी वह लड़का जिद पर अड़ा हुआ था ।कुछ देर घूमने के बाद मैं घर के भीतर चली आई बाद में क्या हुआ मुझे नहीं पता पर उस दिन मुझे देर रात तक नींद नहीं आई। यह सोचकर कि आज के समय के ये जो युवा बच्चे हैं , ये प्यार को नहीं समझते और प्यार करने की इस तरह की गलतियाँ कर बैठते हैं ।जो उनके लिए एक भयावह स्थिति खड़ी कर सकते हैं।

मैं यह बात यहांँ रख कर उन बच्चों के माँ-बाप को किसी भी तरह की टेंशन नहीं दे रही, जिनके बच्चे हॉस्टल या पीजी में रहते हैं बल्कि मैं यह बताना चाह रही हूँ कि बच्चा चाहे हॉस्टल में रहे चाहे पीजी में रहे। उसकी खैर खबर लेते रहिए । उसे सही गलत समझते रहिए।जब बच्चा बाहर रहता हो तब उसके साथ माता-पिता जैसा व्यवहार नहीं एक दोस्त की तरह व्यवहार कीजिए ताकि अगर उसके मन में कोई बात हो तो वह आपके साथ शेयर कर सकें।

आज का जो समय चल रहा है वह जाँच -पड़ताल का समय नहीं है। जाँच -पड़ताल के बजाय बच्चे के व्यवहार में बदलाव को समझना बहुत जरूरी है।

बच्चों को यह समझाना कि प्यार करना गुनाह नहीं है, लेकिन बिना समझ, बिना मार्गदर्शन और बिना जिम्मेदारी के किया गया प्यार अक्सर बच्चों को ऐसे रास्ते पर ले जाता है जहाँ पछतावे के सिवाय कुछ नहीं बचता।

मैं यही कहना चाहूँगी कि अपने बच्चों के साथ संवाद ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। उन्हें यह समझना होगा कि हॉस्टल केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि चरित्र की परीक्षा की जगह भी है। बच्चों के मन में यह विश्वास बिठाना होगा कि अगर वह कोई गलती भी कर बैठे तो माता-पीना उन्हें डांटेंगे नहीं उन्हें सुनेंगे। जब उनके मन में यह विश्वास होगा तो, मुझे लगता है वे गलती नहीं करेंगे और करेंगे भी तो आपके सामने सहर्ष गलती को स्वीकार भी कर लेंगे।

बस इतना सा कहना चाहूँगी कि आज का समय स्ट्रेस का समय है। बच्चों पर पढ़ाई का बहुत प्रेशर है। इस स्ट्रेस से घबराए हुए बच्चों को जहाँ कहीं भी जरा से भी मीठे बोल सुनने को मिलते हैं ।वे उनकी तरफ झुक जाते हैं। यह भी नहीं सोचते कि सामने वाला कौन है? और इन मीठे बोलों को ही प्यार समझते बैठते हैं जबकि वास्तव में यह प्यार नहीं है। इसलिए अपने बच्चों के साथ अच्छे से पेश आए। बाकी फिर तो होनी को कौन टाल सकता है “होइहि सोइ जो राम रचि राखा।

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