
6 लाख सैलरी… फिर भी बीमार पिता को दाने-दाने को तरसाया! कलयुगी बेटे पर DM सविन बंसल का ‘बड़ा हंटर’
देहरादून: बुजुर्गों का सम्मान देवभूमि की परंपरा है, और जो इस परंपरा को तोड़ेगा, उसे प्रशासन का डंडा झेलना पड़ेगा। जिलाधिकारी सविन बंसल ने एक ऐसे मामले में न्याय किया है, जिसे सुनकर किसी का भी कलेजा कांप जाए।
क्या है पूरा मामला?
68 वर्षीय बीमार पिता अशोक धवन अपनी बेबसी लेकर डीएम के ‘जनता दर्शन’ में पहुंचे थे। उनकी व्यथा सुनकर हर कोई हैरान रह गया:
करोड़पति बेटा, पर पिता बेसहारा: बेटा नितिन धवन करीब ₹6 लाख प्रति माह वेतन कमाता है, लेकिन बीमार पिता को फूटी कौड़ी देने को तैयार नहीं।
अदालती आदेश की धज्जियां: एसडीएम कोर्ट ने 2023 और 2025 में भरण-पोषण के आदेश दिए थे, लेकिन रईस बेटे ने पिता को एक रुपया नहीं दिया।
जुल्म की पराकाष्ठा: पिता का आरोप है कि पैसे मांगने पर उनके साथ गाली-गलौच और मारपीट की गई और उन्हें अपनी ही संपत्ति से बेदखल करने की कोशिश की गई।
जिलाधिकारी का ‘ऑन द स्पॉट’ एक्शन:
जुर्ग पिता का दर्द देख डीएम सविन बंसल का पारा चढ़ गया। उन्होंने तुरंत आदेश जारी किए:
₹1.50 लाख की आरसी (RC): बेटे के खिलाफ बकाया धनराशि की वसूली के लिए तुरंत रिकवरी सर्टिफिकेट जारी करने के निर्देश दिए।
ल जाने की नौबत: स्पष्ट चेतावनी दी गई कि न्यायालय के आदेशों की अवमानना और वरिष्ठ नागरिकों का उत्पीड़न किसी भी सूरत में क्षम्य नहीं होगा।
सुरक्षा का भरोसा: पुलिस और प्रशासन को बुजुर्ग पिता की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है।
संस्कार नहीं तो सरकार सिखाएगी सबक” जिलाधिकारी ने कड़ा संदेश दिया है— वरिष्ठ नागरिकों के अधिकार सुरक्षित हैं। यदि कोई बेटा या बेटी अपने माता-पिता को प्रताड़ित करता है, तो प्रशासन उनके खिलाफ सबसे कठोर कार्रवाई करेग


















