
राश्मि ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट
हर नारी नारायणी हो जरूरी नहीं…!
ना ही हर कन्या पूज्य योग्य हो सकती है..!
यह नया ताजा गरमागरम आंदोलन कई सीख दे गया मेरी मानसिकता ही बदल गई—
तेरह – चौदह साल तक की किशोरियों ने ऐसी – ऐसी अश्लील हरकतें की कि सभ्य समाज शरमा जाये,
ऐसे – शब्द बोले जो यहां लिखना भी संभव नहीं है,
यह अपने मां – बाप भाई से नजर कैसे मिलाती होंगीं …?
इनसे सतर्क रहिये,
अपने घर के आस पास भी फटकने मत दीजिए यह समाज ही नहीं संस्कार सभ्यता पारिवारिक मूल्य सब तबाह कर देंगी।
आश्चर्य तो यह भी है कि किसी भी राजनीतिक दल ने इनकी निंदा तक नहीं की….!
कहीं केवल वयस्कों के लिए बनी इस फिल्म के डायरेक्टर आखिर कौन थे …?
सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश दे दिया है सबको छोड़ दिया जाए …
याद रखना सरकार कानून बना सकती है,
पर धर्म संस्कृति संस्कार मान मर्यादा ये सभी गुण परिवार ही दे सकता है।
और दुर्भाग्य है कि आज सोशल मीडिया के युग में परिवार के सभी सदस्यों के हाथों में अलग फोन होता है और अलग पसंद ..
बाप अपनी ही संतान के फोन का पासवर्ड नहीं जान सकता ..
चाहे बेटा हो या बेटी ..!
ऐसे हालात में संस्कृति बचाकर रखना मुझे तो असंभव सा प्रतीत होता है….!



















