
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की रिपोर्ट
रवीकुमार और उनकी पत्नी सिरिशा, तेलंगाना के वारंगल जिले में अपने नाबालिग बच्चों के साथ खुशी-खुशी रह रहे थे।
एक दिन दंपति रेलवे ट्रैक पर मृत पाए गए। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
उनके बच्चों ने पुलिस को बताया कि उनके पड़ोसी वेंकट और प्रमिला उनके माता-पिता से बार-बार ईसाई धर्म अपनाने के लिए कहते रहते थे। वे उन्हें चर्च जाने के लिए भी बार-बार आमंत्रित करते थे। दोस्ती के नाते दंपति चर्च गए और रविवार की प्रार्थनाओं में शामिल भी हुए, लेकिन उन्होंने अपने पड़ोसियों को साफ-साफ बता दिया कि वे अपना धर्म बदलना नहीं चाहते। इससे उनके बीच छोटे-छोटे झगड़े होने लगे।
बाद में वेंकट और प्रमिला ने रवीकुमार को रेडी-मिक्स कंक्रीट के व्यवसाय में निवेश करने के लिए मनाया। उन्होंने वादा किया कि इस व्यवसाय से अच्छा मुनाफा होगा। उन पर भरोसा करते हुए रवीकुमार ने अपनी पत्नी के सोने के आभूषण बैंक में गिरवी रख दिए और वेंकट को रेडी-मिक्स कंक्रीट वाहन खरीदने के लिए 20 लाख रुपये दे दिए।
वेंकट ने वादा किया कि वह व्यवसाय से हर महीने रवीकुमार को 20,000 रुपये देगा। लेकिन उसने सिर्फ दो-तीन महीने पैसे दिए और फिर बंद कर दिया। उसने 20 लाख रुपये भी वापस नहीं किए।
बैंक में गिरवी रखे सोने पर ब्याज लगातार बढ़ता जा रहा था, जिससे रवीकुमार और सिरिशा पर भारी आर्थिक और मानसिक दबाव पड़ने लगा। उनके बच्चे बताते हैं कि वेंकट और प्रमिला धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालते ही रहे।
आर्थिक नुकसान और लगातार उत्पीड़न सहन न कर पाने के कारण दंपति घर छोड़ने का फैसला कर लिया। बाद में वे घाटकेसर रेलवे स्टेशन के पास तेज रफ्तार ट्रेन के सामने कूदकर आत्महत्या कर ली।
पुलिस ने बताया कि कॉल रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि मृत्यु से करीब 30 मिनट पहले रवीकुमार ने आरोपी वेंकट से लंबी बातचीत की थी। अब उनके बच्चे अपने माता-पिता के लिए न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
दोनों आरोपी वेंकट और प्रमिला फिलहाल फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।



















