
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की रिपोर्ट
पराई स्त्री का आकर्षण इंसान से वह कीमत वसूलता है जो उसके पास नहीं होती।
उसके परिवार का विश्वास लूटा जाता है, उस के सम्मान व विश्वनीयता को बर्बाद करने का यह कारण बनता है।
जिस तरह सोने के आभूषण में नकली मोती जड़ना मूर्खता है, उसी तरह पति-पत्नी के शुद्ध रिश्ते में वासना को जगह दे कर पराई स्त्री को स्थान दे दिया जाता है तो वह मनुष्य के विनाश का कारण बनता है।
वैदिक धर्म में जीवन संगिनी को धर्म पत्नी की संज्ञा दी गई है। जिस सम्बंध में धर्म होता है वहीं पवित्र होता है वही सुख दायक होता है। जो सम्बन्ध है ही अधर्म पर आधारित वह सदैव दुख का कारण बनता है। अधर्म दुख का मूल है। और अधर्म से बने सम्बन्ध दुखदाई होते हैं।
इस लिए धर्म पत्नी ही घर की असली देवी होती है और जो व्यक्ति अपनी घर की देवी को छोड़कर बाहर सम्मान खोजता है, वह अपने लिए स्वयं विनाश का निर्माण करता है।।
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