
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की रिपोर्ट
ज़फ़र सरेशवाला ने डेड़ महीने पहले प्रधानमंत्री जी से 14 मुस्लिम व्यक्तियों के प्रतिनिधि-मंडल के साथ मिलने की इच्छा रखी…. निर्देश हुआ कि ज़फ़र सरेशवाला और उनका मुस्लिम शिष्ठमण्डल राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजित डोभाल से मिल ले… (डोभाल साहब किसके प्रतिनिधि थे, यह बताने की ज़रूरत नहीं है, उनका कैबिनेट मिनिस्टर का दर्जा है और शक्तियों में वह नम्बर 2 या 3 माने जाते हैं)
देश के माने हुए 14 बेहद प्रभावी लोगों से युक्त प्रतिनिधि मण्डल ने 100 मिनट तक मुसलमानों के तमाम गिले शिकवे,अपेक्षाएं और मांगे खुल कर रखीं, अजित डोभाल का स्टाफ मुस्लिम शिष्ठमण्डल की सभी मांगों और शिकायतों को नोट कर रहा था…
1.प्रतिनिधि मण्डल ने बंगाल, यूपी और असम के मुख्यमंत्रियों के मुसलमानों के साथ व्यवहार की शिकायत की …बुलडोजरों का ज़िक्र आया,अवैध मज़ारों,मस्जिदों इत्यादि को हटाने और लगातार नोटिस दिए जाने की शिकायतें कीं, मॉब लिंचिंग की शिकायत भी की गई.
2.मुसलमानों को घटती (?) सुविधाओं,शैक्षिक स्तर पर चर्चा की गई, मुसलमानों के लिए नौकरी,रंगनाथ मिश्रा और सच्चर कमेटी की रिपोर्टों को लागू करने की बात की गई (हालांकि सच्चर कमेटी की सभी संस्तुतियां, भाजपा की सभी सरकारों ने केंद्र और राज्य में कांग्रेस सरकारों से कहीं ज़्यादा प्रभावी तरीके से लागू की है…
3.मुस्लिमों के इस प्रतिनिधि मण्डल ने मुसलमानों के लिए 500 अलग शैक्षिक संस्थान खुलवाने और आर्थिक मदद देने की मांग की ,अजित डोभाल ने कहा कि शैक्षिक संस्थान आप लोग खोलें, उसके लिए धन की व्यवस्था देश के दस बड़े व्यापारिक घरानों की व्यवस्था ‘हम’ करवा देंगे…
4.वक्फ बोर्डों और सुप्रीमकोर्ट में चल रहे मामलों पर भी ज़फ़र सरेशवाला के शिष्ठमण्डल ने सरकार से सहानभूतिपूर्वक विचार करने की मांग रखी अवश्य होगी…
5.राज्यो के मंत्रिमंडलों में मुस्लिमों को शामिल करने की डिमांड भी निसंदेह अवश्य उठी होगी…
6.यही स्थिति सैन्यबलों में भर्ती के सम्बंध में भी है..
जैसा कि अरफ़ा शबनम शेरवानी के साथ इंटरव्यू (लिंक कमेंट बॉक्स में )ज़फ़र सरेशवाला ने बताया,इस मीटिंग के बाद ज़फ़र सरेशवाला ने साहब से मुलाकात की , गौरतलब है कि इस मीटिंग के ठीक एक सप्ताह बाद ज़फ़र सरेशवाला ने असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंता विस्वास सरमा से लंबी मुलाकात की ! शुभेन्दु अधिकारी से भी ज़फ़र सरेशवाला जल्दी ही मिलने की उम्मीद कर रहा है… प्रधानमंत्री के हाथ जिसके सिर पर है,उससे मिलने को कौन मना कर सकता है ?
लखनऊ के सबसे बड़े लूलू माल ,जिसका मालिक केरल का मुस्लिम है और दुबई में रहता है,…उसको भी लखनऊ में स्थापित करने में ज़फ़र सरेशवाला की भूमिका हो सकती है, योगीजी से भी ज़फ़र सरेशवाला की मुलाकात होती रही है… और लूलू माल के मालिक से भी, मीडिया में चित्र उपलब्ध हैं….
इन मुलाकातों का क्या फर्क पड़ता है,उसका उदाहरण है कि यूपी में सभी मुस्लिम तीन तलाक पीड़ित महिलाओं को मासिक भत्ता और आयुष कार्ड देने की परसों की घोषणा है…यहां तक कि असम और बंगाल में मुस्लिमों के लिए कुछ नई सुविधाओं की घोषणा होने की उम्मीद बंध गई है…
इधर हिंदुओं की स्थिति देखिये, हम इसमें ही खुश है कि इक्का दुक्का अवैध मस्जिद,दरगाह के ऊपर बुलडोजर चल जाता है,सोशल मीडिया वाले हिन्दू उन्हीं क्लिपिंग को डाल डाल कर मोदी,योगी के तराने गाते रहते हैं, मोदी ने मैलोनी को चॉकलेट पेश कर दी…इसी प्रपंच पर हम लट्टू हुए जा रहे हैं…
कुछ ”राधे राधे” नाच-गाकर आत्ममुग्ध हैं…कुछ लड्डू गोपाल को नहला धुला, खिला कर ,शयन कराने में व्यस्त हैं… कोई निरर्थक काम हिंदुओं से छूटना नहीं चाहिए,कुछ नहीं तो 50 किलो खिचड़ी बनवा कर चौराहे पर पात्रों-कुपात्रों को फ्री खिला रहे हैं…
क्या आज तक हिंदुओं के किसी प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री इत्यादि से मिलकर अपनी चिंताओं को उन तक पहुचाने की चेष्ठा की ? PM/CM छोड़ो…हिन्दू तो अपनी समस्याओं के लिए जिले के DM तक से मिलने की हिम्मत और इच्छा नहीं जुटा पाते हैं !
यूपी के अनेक मंन्दिरों के पुजारियों की हत्या होने की लगातार खबरें आती हैं…वृंदावन/वाराणसी इत्यादि में धर्माचार्यों,महंतों और पॉलिटिकल संतों का डेरा है…कभी योगीजी से मिलकर मंन्दिरों और पुजारियों की लगातार होती हत्याओं पर सुरक्षा या आर्थिक हर्जाना मांगा ?
पिछले 12 वर्ष में प्रधानमंत्री की मुस्लिम प्रतिनिधिमंडलों से कम से कम 50 मुलाकातें अवश्य हुई होंगीं, वह बगैर वोट दिए… मनचाहा काम करा लेते हैं… हम वोट,नोट और हर तरीके की सपोर्ट भी देते हैं… मगर सत्ता से मांगते कुछ नहीं हैं !! सत्ता की निगाह में हमारी कीमत बंधुआ वोटर से ज़्यादा नहीं



















