
सुशील शंकर विग एडिटर इन चीफ की कलम से महोबा BJP में तूफान थम गया… जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा और जिला मंत्री दीपाली तिवारी का समझौता हो गया ? लेकिन सवाल अभी बाकी!
कल तक महोबा की भाजपा में घमासान मचा हुआ था।
26 अप्रैल को पूर्व जिला मंत्री दीपाली तिवारी फेसबुक लाइव आकर रो-रोकर बयान दे रही थीं —
“जब मैंने जिला उपाध्यक्ष पद मांगा तो जिला अध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा ने कहा — एक बार हमबिस्तर हो जाइए… मैं आपको उपाध्यक्ष बना दूंगा, लखनऊ-दिल्ली साथ घुमाऊंगा और जिला पंचायत का टिकट भी दिलवा दूंगा।”
मना करने पर दीपाली को कथित मॉर्निंग वॉक के दौरान (जैसा की उन्होंने बुंदेली वार्ता को बताया) धमकी दी गई — “तुम्हारे पति को झूठे दुष्कर्म के मामले में फंसाकर जेल भिजवा देंगे।”
दीपाली ने आरोप लगाया कि जिला महामंत्री और एक उपाध्यक्ष (पंकज तिवारी) भी दबाव बना रहे थे।
27 अप्रैल को दीपाली तिवारी शिकायत पत्र लेकर एसपी महोबा पहुंचीं। मामला पुलिस में दर्ज हो गया। पूरे बुंदेलखंड में सनसनी फैल गई। शाम को बुंदेली वार्ता ने इस पूरे घटना क्रम की कहानी आपकी बताई थी, और बताया कि दो सदस्यीय टीम आएगी-जाँच करेगी।
लेकिन मात्र 48 घंटे में पूरा मामला पलट गया।
भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने तुरंत संज्ञान लिया। प्रदेश उपाध्यक्ष कमलवती सिंह और क्षेत्रीय महामंत्री संत विलास शिवहरे को महोबा भेजा गया। दोनों ने दोनों पक्षों के साथ लंबी बैठक की, मध्यस्थता की और आखिरकार समझौता करा दिया। तस्वीर सामने है, तीन नेता एक साथ… एक मंच… एक संदेश — “भाजपा एकजुट है”।
लेकिन कुछ सवाल भी हैं-
• क्या ये समझौता दबाव में हुआ?
• महिलाओं की आवाज दबा दी गई या पार्टी हित में फैसला लिया गया?
• क्या भविष्य में ऐसी घटनाओं पर पार्टी सख्त एक्शन लेगी



















