
### लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का मामला
आपका सवाल भारत की मौजूदा राजनीति से जुड़ा है, जहां लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष ने अविश्वास प्रस्ताव लाने की कोशिश की है। यह मुद्दा फरवरी 2026 में संसद सत्र के दौरान उभरा, जब विपक्ष ने स्पीकर पर पक्षपात का आरोप लगाया। आइए шаг за шагом समझते हैं कि क्या हुआ और “राहुल गांधी को अपनों ने धोखा दिया” वाली बात कितनी सही है।
#### पृष्ठभूमि: अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया गया?
– विपक्षी दलों (मुख्य रूप से कांग्रेस, डीएमके, एसपी आदि) ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर आरोप लगाया कि वे विपक्षी सांसदों को बोलने का मौका नहीं दे रहे, खासकर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान।
– खास मुद्दा: राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख एम एम नरवणे के संस्मरण से जुड़े मुद्दे (चीन सीमा विवाद से संबंधित) को उठाने की कोशिश की, लेकिन स्पीकर ने अनुमति नहीं दी। इससे सदन में हंगामा हुआ, और 8 विपक्षी सांसदों को निलंबित कर दिया गया।
– 10 फरवरी 2026 को, विपक्ष के 118 सांसदों ने संविधान के अनुच्छेद 94(c) के तहत अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा। इसका उद्देश्य स्पीकर को पद से हटाना था, क्योंकि विपक्ष का दावा था कि बिरला भाजपा के पक्ष में काम कर रहे हैं।
#### राहुल गांधी की भूमिका: क्या उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए?
– दिलचस्प बात यह है कि विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर नहीं किए।
– कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, संसदीय लोकतंत्र में LoP का स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि यह पद की गरिमा के खिलाफ है। यह फैसला कांग्रेस की रणनीति का हिस्सा लगता है, न कि कोई आंतरिक विद्रोह।
– हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स (जैसे “न्यूज की पाठशाला” का वीडियो) इसे “धोखा” के रूप में पेश कर रही हैं।
### “अपनों ने धोखा दिया” वाली बात: क्या सच्चाई है?
– यह दावा मुख्य रूप से दो चीजों पर आधारित है:
1. **कांग्रेस की महिला सांसदों की चिट्ठी**: अविश्वास प्रस्ताव से एक दिन पहले, कांग्रेस की कुछ महिला सांसदों ने स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर उनकी निष्पक्षता की तारीफ की। इसमें कहा गया कि स्पीकर ने सदन को सुचारू रूप से चलाने में अच्छा काम किया। यह पत्र विपक्ष की रणनीति के उलट था, और कुछ मीडिया ने इसे “अपनों का धोखा” बताया, क्योंकि इससे स्पीकर की छवि मजबूत हुई।
2. **गठबंधन में दरार**: टीएमसी (ममता बनर्जी की पार्टी) ने इस प्रस्ताव से दूरी बना ली। इंडिया गठबंधन में पहले से ही मतभेद हैं, और टीएमसी का न समर्थन करना राहुल गांधी के लिए झटका माना जा रहा है। कुछ रिपोर्ट्स इसे “अपनों का betrayal” कह रही हैं, क्योंकि टीएमसी विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है।
– लेकिन क्या यह वाकई “धोखा” है? यह ज्यादा राजनीतिक रणनीति और मतभेद लगते हैं, न कि कोई साजिश। कांग्रेस ने स्पष्ट किया कि राहुल के हस्ताक्षर न करने का फैसला जानबूझकर था। महिला सांसदों की चिट्ठी भी अलग संदर्भ में थी (शायद सदन में महिलाओं के मुद्दों पर), और इसे सीधे धोखे से जोड़ना अतिरंजित लगता है। सोशल मीडिया पर भी कुछ पोस्ट्स स्पीकर के खिलाफ विपक्ष की शिकायतें हैं, लेकिन betrayal का सीधा जिक्र नहीं मिला।
### स्पीकर की प्रतिक्रिया और आगे क्या?
– ओम बिरला ने कहा कि वे अविश्वास प्रस्ताव पर फैसला होने तक लोकसभा की अध्यक्षता नहीं करेंगे। इससे सदन में गतिरोध बढ़ा है।
– अविश्वास प्रस्ताव पास होने के लिए बहुमत चाहिए, जो विपक्ष के पास नहीं है (एनडीए के पास बहुमत है)। इसलिए, यह ज्यादा सांकेतिक कदम लगता है।
– कुछ मीडिया चैनल (जैसे टाइम्स नाउ नवभारत) इसे सनसनीखेज बना रहे हैं, लेकिन तथ्यों से लगता है कि यह विपक्ष की एकजुटता की कमी को उजागर करता है, न कि कोई बड़ा धोखा।


















