April 19, 2026 10:55 pm

Category: epaper

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कल्पना कीजिए, एक परिवार अपने किसी अपने की जान बचाने के लिए अस्पताल के बाहर खड़ा है, और अंदर से डॉक्टर सिर्फ़ ‘रिपोर्ट’ नहीं, बल्कि ‘लाखों का बिल’ थमा देता है। राज्यसभा में राघव चड्ढा ने आज उसी कड़वे सच पर चोट की है प्राइवेट अस्पतालों की चकाचौंध के पीछे एक ऐसी हकीकत छिपी है, जहाँ इलाज बाद में शुरू होता है और घर की जमा-पूंजी पहले खत्म हो