
संदीप सबरवल ब्यूरो चीफ की रिपोर्ट एक्टिविस्ट को 5 महीने जेल में रखने पर नोएडा डीएम मेधा रूपम को मिली सजा, अपनी सैलरी से देना होगा 5 लाख का मुआवजा! उत्तर प्रदेश के नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े एक मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका (NSA) के तहत हिरासत आदेश को पूरी तरह निरस्त कर दिया है।
अदालत ने स्पष्ट कहा कि एक्टिविस्ट को अनुचित और गैरकानूनी तरीके से इतने महीनों तक सलाखों के पीछे रखा गया। इस अवैध हिरासत के एवज में कोर्ट ने आकृति चौधरी को 5 लाख रुपये बतौर हर्जाना देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस भारी-भरकम मुआवजे की भरपाई नोएडा की जिलाधिकारी (डीएम) मेधा रूपम के व्यक्तिगत वेतन से की जाएगी।
हाई कोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद प्रशासनिक और नौकरशाही हलकों में हड़कंप मच गया है। अदालत का यह रुख संदेश देता है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की अनदेखी अधिकारियों को निजी तौर पर भारी पड़ सकती है।


















