October 27, 2026 1:41 am

आज की आज़ादी… या अंधा स्वार्थ? एक दिल दहला देने वाली दास्तां! ​बेंगलुरु के मराथाहल्ली के रहने वाले श्री सोमसुंदर जी का हंसता-खेलता परिवार था। दो बेटियां, जिनमें बड़ी बेटी श्वेता को उन्होंने पाल-पोसकर इंजीनियर बनाया। हर ख्वाहिश पूरी की, खून-पसीने की कमाई से पढ़ाया-लिखाया ताकि बेटियां अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। ​

  ​वीना विग एडिटर की रिपोर्ट बेंगलुरु के मराथाहल्ली के रहने वाले श्री सोमसुंदर जी का हंसता-खेलता परिवार था। दो बेटियां, जिनमें बड़ी बेटी श्वेता को उन्होंने पाल-पोसकर इंजीनियर बनाया। हर ख्वाहिश पूरी की, खून-पसीने की कमाई से पढ़ाया-लिखाया ताकि बेटियां अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। ​लेकिन जैसे ही पैर लगे, पंख निकल आए… … Read more