चोर की भक्ति: जब नीयत बदली, तो नियति बदल गई!
वीना विग कि कलम से गाँव की चौपाल पर शाम ढल रही थी। मृदंग की थाप और झांझ की झंकार के बीच भागवत कथा वाचक पंडित जी कन्हैया के रूप का बड़ा ही मनमोहक चित्रण कर रहे थे। उन्होंने वर्णन किया— “मेरे सांवरिया के गले में वैजयंती माला है, कानों में मकराकृत कुंडल झिलमिला … Read more
